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गंगा में रासायनिक पानी रोकने के लिए 100 'कृषि सखियों' को दी जिम्मेदारी, 5 ब्लॉकों के 6250 किसान शामिल

Published: Sun, 22 Feb 2026 05:58 PM (IST)Updated: Sun, 22 Feb 2026 06:01 PM (IST)

रायबरेली में गंगा को रासायनिक प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। गंगा किनारे के पांच ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता। रायबरेली। गंगा का पानी साफ और प्रदूषण मुक्त रहे, इसके लिए शासन स्तर पर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। अब गंगा किनारे गांवों पर फोकस किया गया है कि इन गांवों के किसान रसायन मुक्त खेती करें, ताकि गंगा तक रसायन युक्त पानी न पहुंचे। यह प्रोजेक्ट गंगा किनारे के अन्य जनपदों में भी चल रहा है।

इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। इसके लिए गंगा कटरी क्षेत्र के पांच ब्लाकों में रसायन मुक्त खेती की जिम्मेदारी कृषि सखियों को दी गई है। कृषि सखियां किसानों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही रसायन मुक्त खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसकी निगरानी अधिकारियों की ओर से की जा रही है। यही नहीं इससे जुड़े किसानों को रबी व खरीफ में जैविक बीज के लिए सब्सिडी भी दी जा रही है।

कृषि रसायन का जरूरत से अधिक प्रयोग करते हैं किसान

किसान कृषि रसायन का जरूरत से कहीं अधिक प्रयोग करते हैं। गंगा किनारे गांवों में बारिश के दिनों में खेतों से रसायन युक्त पानी गंगा तक पहुंचता है। इसे रोकने की पहल की गई है। वैसे जिले के कई प्रगतिशील किसान रसायन मुक्त कर रहे हैं।

फसलों में जीवामृत, घनामृत, हरी खाद का प्रयोग कर रहे हैं। अब गंगा किनारे के किसान भी रसायन मुक्त खेती करें, इस पर शासन का फोकस है। इसके लिए गंगा किनारे के पांच ब्लाक ऊंचाहार, दीनशाहगौरा, डलमऊ, लालगंज, सरेनी को चुना गया है।

 100 कृषि सखियां बनाईं

इन ब्लाकों में 100 कृषि सखियां बनाई गई। इसमें गांवों की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर किसानों को प्रेरित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इन ब्लाकों में 50 क्लस्टर बनाए गए हैं। इसमें 50 हेक्टेयर भूमि ली गई है। एक क्लस्टर में 125 किसानों को शामिल किया गया है। कुल 6250 किसानों को इससे जोड़ा गया है। एक क्लस्टर की दो कृषि सखियों को

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इन किसानों को खरीफ व रबी की फसलों में बोआई और जीवामृत, घनामृत आदि बनाने के लिए दो-दो हजार रुपये दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रति एकड़ के हिसाब से जैविक बीज के लिए 500 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है।


गंगा किनारे के पांच ब्लाकों में रसायन मुक्त खेती पर जोर दिया जा रहा है। कृषि सखियां प्रचार प्रसार करने के साथ ही किसानों को योजनाओं की जानकारी दे रही हैं। 50 क्लस्टर बनाकर 6250 किसानों को शामिल किया गया है। -विनोद कुमार, उपकृषि निदेशक रायबरेली