रायबरेली में किसान को उपभोक्ता फोरम से मिली राहत, बीमा कंपनी देगी 50 हजार रुपये
रायबरेली के एक किसान ने अपनी मृत भैंस के बीमा दावे को नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद उपभोक्ता फोरम में शिकायत की।

HighLights
किसान ने मृत भैंस के बीमा दावे पर शिकायत की।
बीमा कंपनी ने दावा 'नो क्लेम' कहकर अस्वीकारा था।
उपभोक्ता फोरम ने 50 हजार रुपये देने का आदेश दिया।
जागरण संवाददाता, रायबरेली। किसान ने आय के लिए भैंस खरीदकर बीमा कराया। भैंस मर जाने पर कंपनी ने दावा नो क्लेम कर दिया। उपभोक्ता फोरम के आदेश पर बीमा कंपनी को 50 हजार रुपये किसान को देने होंगे।
यह है पूरा मामला
बरगदहा के चेतराम ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर बताया कि पशुधन योजना के तहत एक भैंस का बीमा कराया जो एक साल के लिए मान्य था। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने प्रीमियम प्राप्त कर 50 हजार रुपये का बीमा प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
बीमित समय में वादी की भैंस मर गई। वादी ने इसकी सूचना बीमा कंपनी को दी। कंपनी के सर्वेयर ने मृत पशु की जांच की। संबंधित के बयान दर्ज किए, इसके बाद पशु का पोस्टमार्टम कराया गया।
बीमा कंपनी के कहने पर वादी ने सभी रिपोर्ट लगाकर दावा भुगतान के लिए पेश किया। कई दिनों तक कंपनी ने उसका कोई जवाब नहीं दिया। वादी द्वारा जानकारी मांगने पर दावा नो क्लेम कर दिया गया। थक हारकर वादी ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। नोटिस तामील हुई।
बनावटी कारण दिखाकर दावा नो क्लेम किया था
बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने बहस के दौरान कहा कि जांचकर्ता की रिपोर्ट व दावा दस्तावेज के अनुसार फोटोग्राफ में जीवित व मृत पशु में अंतर है। इसके अतिरिक्त वादी द्वारा भैंस के इलाज संबंधी कागज नहीं लगाए गए हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में है कि मृत पशु एक बार नहीं कई बार बीमार हुआ था, इससे साबित होता है कि वादी द्वारा पशु की ठीक से देखभाल नहीं की गई है।
वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता केपी वर्मा ने कहा कि बीमा के समय पशु का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र दिया गया था। सर्वेयर द्वारा मौके पर कोई साक्ष्य नहीं जुटाए। बाद में बनावटी कारण दिखाकर दावा नो क्लेम किया गया है। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष मदन लाल निगम, सदस्य प्रतिमा सिंह व सुनीता मिश्र ने किसान के हक में फैसला दिया।
