रायबरेली : राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल लिखा-पढ़ी में 25 शैय्या का है, लेकिन यहां सिर्फ दो बेड हैं, जिन पर शायद ही कभी मरीज भर्ती हुए हों। नया भवन निर्माणाधीन है, उसी में अस्पताल खोलने का इंतजार अधिकारी कर रहे हैं। फिलहाल, एक चिकित्सक के भरोसे आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था है। गुरुवार को जागरण टीम ने अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल जाना। पेश है रिपोर्ट..

सुबह 11.25 बजे। अस्पताल का एक कर्मचारी कुर्सी पर बैठकर बीड़ी पी रहा था। योग शिक्षक डा. रवि सिंह मरीज देखते मिले। अस्पताल में गिनती के मरीज नजर आए। दवा काउंटर पर कोई नहीं था। कैमरा देखते ही फार्मासिस्ट सहित दूसरे कर्मचारी भी आकर डट गए। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. संजय सिंह के पास भी सिर्फ एक मरीज था। चिकित्सक ने बताया कि रोजाना औसतन 100 मरीजों का उपचार किया जाता है। दो चिकित्सक और एक योग शिक्षक की तैनाती है। दूसरे डाक्टर को बछरावां से संबद्ध कर दिया गया है। अस्पताल परिसर में मवेशी बंधे होने के बाबत बताया गया कि कई बार इसकी शिकायत की गई। पुलिस आती है तो लोग मवेशी खोल ले जाते हैं और जाने के बाद फिर से यहीं आकर बांध जाते हैं। चहारदीवारी टूट गई है, इसलिए आवाजाही पर रोक नहीं लग पा रही है। अस्पताल के आसपास गंदगी पसरी है। बताया गया कि नया अस्पताल बन रहा है। उसका निर्माण होने पर सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी। बता दें कि ये 25 शैय्या का अस्पताल है, जहां पर उपचार कक्ष में सिर्फ दो बेड पड़े हैं। इनपर एक भी मरीज भर्ती नहीं था। बेडों की हालत देखकर लग रहा था कि शायद ही कभी यहां मरीज भर्ती किए गए हों।

50 शैय्या का अस्पताल निर्माणाधीन

अस्पताल परिसर में ही 50 शैय्या का नया अस्पताल बन रहा है, जिसका निर्माण कार्य छह माह में पूरा होने की बात अफसर कह रहे हैं। इस अस्पताल में शल्य चिकित्सा की व्यवस्था भी होगी।

ये आई नई दवाएं

योग शिक्षक ने बताया कि नई दवाओं में दांतों के लिए दससंस्कार चूर्ण, त्वचा रोग के लिए वृहद मरीचारि तेल, जोड़ों के दर्द के लिए दशमूल काढ़ा, मालिश के लिए पंचगुड़ तेल और सांस के रोगियों के लिए हरीद्राखेड़ आई है।

Edited By: Jagran