...अब बंदी बताएंगे खाना पौष्टिक है या नहीं

रायबरेली : जिला कारागार के बंदी आपको बेहतर खानपान की जानकारी दें तो अचरज में न पड़ जाइएगा। जी हां, वे इग्नू से छह माह का फूड एंड न्यूट्रीशियन की पढ़ाई जो कर रहे हैं। जेल से छूटने के बाद उन्हें काम के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े, इसलिए उन्होंने इस पाठ्यक्रम को चुना है। इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय में अब तक 46 बंदियों का पंजीकरण कराया जा चुका है। ये बंदी अगर जेल से छूट भी जाते हैं, तो भी पढ़ाई जारी रखकर परीक्षा दे सकते हैं। फूड एंड न्यूट्रीशियन का कोर्स करने के बाद ये फ्रीलांसर की तरह काम कर सकते हैं। पोषण और आहार के बारे में अच्छी जानकारी होने पर इन्हें अस्पताल, शिक्षण संस्थान सहित प्राइवेट कंपनियों में आसानी से नौकरी मिल जाएगी। स्वस्थ रहने के लिए लोग योग करते हैं, जिम जाते हैं। इसके साथ ही खानपान यानी आहार पर विशेष ध्यान देते हैं। उन्हें क्या खाना चाहिए, कब खाना चाहिए और कितनी डाइट लेनी चाहिए, इन सबके बारे में पोषण और आहार विशेषज्ञ ही अच्छे से बता सकते हैं। यही पढ़ाई बंदियों को जेल में कराई जा रही है। जेल प्रशासन का उद्देश्य ये है कि बंदी जब जेल से छूटें तो खाली न बैठें। उन्हें काम करके पैसे कमाने का अवसर जरूर मिले, ताकि वे दोबारा अपराध की ओर रुख न करें। 257 बंदियों को बना रहे साक्षर: जेल में शिक्षाध्यापक सुनील शुक्ला 247 निरक्षर बंदियों को साक्षर बना रहे हैं। पांचवीं कक्षा में भी 65 बंदी हैं, जिनका पंजीकरण जेल के नजदीकी परिषदीय विद्यालयों में कराया गया है। 10वीं, 12वीं की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले बंदियों को प्राइवेट फार्म भराया जाता है और जेल में ही परीक्षा कराई जाती है। बंदी जेल से छूटने के बाद रोजगार, स्व-रोजगार से जुड़ें, इसी के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में इच्छुक बंदियों को फूड एंड न्यूट्रीशियन का कोर्स कराया जा रहा है। सत्य प्रकाश, जेलर

Edited By: Jagran