रायबरेली: जेल में पुस्तकालय। जी हां, जल्द ही कारागार में कैदी और बंदियों के लिए लाइब्रेरी खोली जाएगी। तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, बस शुभारंभ की घड़ी का इंतजार है। आने वाले वक्त में कैदी व बंदी धर्म और अध्यात्म की बातें करते मिलें तो अचरज न कीजिएगा।

कारागार में पुस्तकालय खोलने का विचार करीब छह माह से चल रहा था। नई बैरक बनकर तैयार हुई तो इसी में पुस्तकें जमा दी गईं। नोएडा की बीमटेक संस्था ने पांच सौ पुस्तकें उपलब्ध कराई हैं, जिनमें धर्म और अध्यात्म के अलावा नावेल, कहानियों की किताबें शामिल हैं। संस्था द्वारा जेल को पुस्तकों की दूसरी खेप भी जल्द मिलने वाली है। किताबें हिदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में हैं। कैदी और बंदियों के लिए पुस्तकालय में बैठकर किताबें पढ़ने की व्यवस्था की गई है। वे चाहें तो पुस्तकें बैरकों में भी ले जा सकते हैं।

फीडबैक लेगी संस्था

कैदी और बंदी जो पुस्तकें पढ़ने के लिए लेंगे, बाद में उनसे उस पाठ्य सामग्री के बाबत फीडबैक भी लिया जाएगा। बीएमटेक संस्था के लोग समय-समय पर जेल में विजिट करके उनसे रूबरू होंगे, सुझाव लेंगे कि पुस्तकालय में क्या और बेहतर किया जा सकता है।

बदलेगी मनोदशा

जेल में कैदियों और बंदियों के व्यवहार में सुधार के लिए नित नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी में पुस्तकालय भी शामिल है। पढ़े लिखे कैदी व बंदी किताबें पढ़ेंगे तो उनकी मनोदशा बदलेगी। धर्म और अध्यात्म से जुड़ाव होगा तो अपराध की तरफ ध्यान नहीं जाएगा। वे अगर जेल से बाहर निकलते हैं तो बेहतर सामाजिक जीवन जी सकेंगे।

जेल में पुस्तकालय और वाचनालय खुलना है। पुस्तकें भी आ गई हैं। जल्द ही इसका शुभारंभ कराया जाएगा।

अविनाश गौतम, जेल अधीक्षक

Edited By: Jagran