गांवों को चमकाएगी ‘मातृभूमि योजना’

रायबरेली : अब तक गांवों में निजी खर्च पर विकास कार्य कराने की कोई विशेष व्यवस्था या प्रविधान नहीं था। बड़े-बड़े शहरों या विदेशों में जाकर कामयाबी की बुलंदियों को छूने वाले चाहकर भी अपने गांव का विकास नहीं करा पाते थे। इसे देखते हुए सरकार की ओर से मातृभूमि योजना चलाई गई है। गांवों के विकास की खातिर केंद्र और प्रदेश सरकारें तो काम कर ही रहीं हैं, अब निजी खर्च से भी गांवों को चमकाया जाएगा। इसी उद्देश्य के तहत प्रदेश सरकार की ओर से मातृभूमि योजना चलाई गई है। इसके तहत उन लोगों को एक प्लेटफार्म मिलेगा जो अपने निजी खर्च पर गांव के लिए कुछ करना चाहते हैं। सरकारी स्कूल में स्मार्ट कक्षाओं की व्यवस्था, गांव में सामुदायिक भवन, पुस्तकालय, व्यायाम स्कूल भवन, सीसी कैमरे, सर्विलांस सिस्टम, फायर सर्विस स्टेशन के भवन, अंत्येष्टि स्थल, सोलर लाइट की स्थापना समेत कोई भी विकास कार्य कराया जा सकेगा। इसके लिए उन्हें आवेदन करना पड़ेगा। विकास विभाग आवेदक की इच्छानुसार प्रोजेक्ट का एस्टीमेट बनाएगा। इसके बाद वह कार्य कराया जाएगा। निजी संस्थाएं भी गांवों को चमकाने में सरकार की मदद कर सकेंगी। 40 फीसद धनराशि लगाएगी सरकार: मातृभूमि योजना के तहत न केवल कोई शख्स बल्कि निजी संस्थाएं भी गांवों का विकास करा सकेंगी। किसी भी प्रोजेक्ट की जो लागत होगी, उसका 40 फीसद हिस्सा वह विभाग लगाएगा, जिससे संबंधित कार्य होगा। उदाहरण के तौर पर अगर कोई सामुदायिक भवन बनवा रहा है तो इसकी लागत की 40 फीसद धनराशि पंचायत राज या ग्राम विकास विभाग देगा। गांव में कराए काम का होगा नाम: मातृभूमि योजना के तहत जो भी कार्य गांव में कराए जाएंगे, उसका पूरा विवरण संबंधित कार्यस्थल पर एक बोर्ड या शिलापट पर दर्ज होगा। इसमें उस शख्स या संस्था का नाम रहेगा, जिसने विकास कार्य में 60 फीसद की धनराशि दी है। यानी गांव में काम कराने वालों का नाम भी होगा। गांवों में विकास कार्यों के लिए शासन की ओर से मातृभूमि योजना चलाई गई है। इसमें कोई भी शख्स अपनी इच्छानुसार अपने गांव में विकास के कार्य करा सकेगा। गिरीश चंद्र, जिला पंचायत राज अधिकारी

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