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'सनातन की पताका ऊंची रहेगी तो भारत का कोई बाल बांका नहीं कर पाएगा', रायबरेली में बोले सीएम योगी

Published: Mon, 14 Sep 2026 03:23 AM (IST)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में श्री शिव महापुराण कथा के दौरान कहा कि सनातन की परंपरा से भारत की ...और पढ़ें

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HighLights

  1. मुख्यमंत्री योगी ने रायबरेली में शिव महापुराण कथा में भाग लिया।

  2. कहा, सनातन परंपरा भारत की शक्ति और एकता का आधार।

  3. व्यासपीठों ने समाज को प्रेरणा दी, शिव भक्ति लोकमंगल का मार्ग।

जागरण संवाददाता, रायबरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब तक भारत की धरती पर पावन कथाओं की परंपरा चलती रहेगी, सनातन की ध्वजा-पताका कभी झुकने नहीं पाएगी। सनातन की पताका ऊंची रहेगी तो भारत का कोई बाल बांका नहीं कर पाएगा। मध्यकाल में देश को विदेशी आक्रांताओं का सामना करना पड़ा।

भारत के धर्मस्थलों और आस्था पर प्रहार हुए, लेकिन व्यासपीठों से निकली आध्यात्मिक धारा ने सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को कमजोर नहीं होने दिया। गोस्वामी तुलसीदास का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मध्यकाल में रामकथा के माध्यम से समाज को जोड़ने और उसकी चेतना जगाने का कार्य किया।

उन्हें अकबर के दरबार में नवरत्न बनने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि उनके राजा केवल राम हैं। उस कठिन कालखंड में रामलीलाओं और रामकथा के माध्यम से राजा रामचंद्र की जय का उद्घोष समाज की चेतना जगाने वाला शंखनाद था। व्यासपीठों ने हर कालखंड में समाज को नई प्रेरणा देने के साथ राष्ट्र के उन्नयन की नींव मजबूत की है।

मुख्यमंत्री रविवार को ऊंचाहार में खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा श्रवण करने पहुंचे। कथा स्थल पर पहुंचते ही वेदपाठी बटुकों ने शंखनाद और डमरू की मंगल ध्वनि के बीच उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ को नमन किया और कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री योगी ने पंडाल और उसके बाहर हजारों की संख्या में कथा श्रवण करने आए सनातनियों को देखकर कहा कि जिसे ईश्वर की भक्ति प्राप्त हो गई, मानो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो गईं।रामायण में प्रभु की भक्ति हनुमान जी को मिली तो वे लोकपूज्य हो गए। आज भी प्रत्येक सनातन धर्मावलंबी हनुमान जी की पूजा और अनुष्ठान से जुड़कर स्वयं को धन्य महसूस करता है।

शिव भक्ति भी मनुष्य को इसी प्रकार लोकमंगल और कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में वेशभूषा, खान-पान और रहन-सहन अलग हो सकता है, लेकिन शिव के प्रति भक्ति का भाव एक है। हिमालय से लेकर रामेश्वरम तक भगवान शिव के पवित्र ज्योतिर्लिंग भारत की सांस्कृतिक एकता और एकात्मकता का दर्शन कराते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में मर्यादा की बात होती है तो हम अयोध्या की ओर देखते हैं। चेतना की चर्चा होती है तो काशी, भक्ति की बात आती है तो मथुरा-वृंदावन और समरसता की चर्चा होती है तो प्रयागराज की ओर देखते हैं। नैमिषारण्य और शुकतीर्थ की धरती ने हजारों वर्ष पहले ज्ञान की उस परंपरा को आगे बढ़ाया, जिसे ऋषियों ने पुराणों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया

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