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रायबरेली में सीएम योगी बोले- हमारे राजा श्रीराम हैं, अकबर नहीं;  सनातन की शक्ति पर दिया जोर

Published: Mon, 14 Sep 2026 08:51 AM (IST)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में शिव महापुराण कथा के मंच से कहा कि राजनीतिक कमजोरियों के बावजूद भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता हमेशा बनी रही है।

HighLights

  1. सीएम योगी ने रायबरेली में शिव महापुराण कथा को संबोधित किया।

  2. उन्होंने कहा, "हमारे राजा राम हैं", तुलसीदास का उदाहरण दिया।

  3. सनातन धर्म की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता पर बल दिया।

जागरण संवाददाता, रायबरेली। चड़रई चौराहा में आयोजित शिव महापुराण कथा के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीतिक कमजोरियों के कारण मध्य काल में भले ही देश विदेशी आक्रांताओं का सामना करने के लिए मजबूर हुआ हो, लेकिन उस काल खंड में भी पावन कथा के माध्यम से व्यास पीठ से सदैव जो धारा प्रस्फुटित होती थी, वह सामाजिक एकता के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक उन्नयन को आगे बढ़ाती रही है।

उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज को बहुत सारे प्रस्ताव आए कि अकबर के दरबार में आप भी चलिए, आपको नवरत्नों में से सम्मान मिल जाएगा। उन्होंने इसका जबाव दिया कि अकबर कौन है?

उन्हें बताया गया कि भारत का बादशाह (राजा) है। तब गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने कहा कि आप गलत बोल रहे हैं हमारे तो राजा राम हैं। राम के अतिरिक्त मैं किसी को अपना राजा नहीं मान सकता।

रविवार दोपहर 12.55 बजे पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास के प्रति वर्तमान पीढी को कृतग्यता ज्ञापित करना चाहिए। जिन्होंने उस समय रामलीला के माध्यम से समाज की चेतना को जागरूक करने के लिए निरंतर काम किया।

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रामलीला के माध्यम से उस समय राजा रामचंद्र के जयघोष का शंखनाद किया था। यही नहीं अकबर को चुनौती देते हुए कहा था हमारे राजा राम हैं। जब भी जीवन में मर्यादा की बात होती है तो हम अयोध्या धाम, चेतना की चर्चा होती तो काशी, भक्ति की बात होती तो मथुरा वृंदावन की ओर देखते हैं।

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जीवन में समरसता की चर्चा करते तो प्रयागराज की ओर देखते है। प्रदेश में पांच हजार वर्ष पहले नैमिष तीर्थ में सुखदेव जी महराज ने पहली भागवत कथा का श्रवण राजा परीक्षित को कराया था। 88 हजार ऋषियों ने नैमिषारण्य में ज्ञान की इस धारा को पुराणों के माध्यम से वर्तमान पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखा है।

उन्होंने कहा कि शिव एक ऐसे महादेव हैं, जिनके पवित्र ज्योर्तिलिंग पूरे भारत की सांस्कृतिक सीमाओं का आध्यात्मिक दृष्टि से उसकी ओर हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक सांस्कृतिक एकता उन पावन ज्योतिर्लिंगों के माध्यम से भारत की सीमाओं को भी तय करती है।

वेशभूषा भले अलग हो, लेकिन शिव के लिए भक्ति एक है। उन्होंने कहा कि पं. प्रदीप मिश्र की कथा को नजदीक से देखने समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि शिव की भक्ति कंकड़ कंकड़ में शंकर के निवास का एहसास कराती है।

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उन्होंने कहा कि यह पावन कथा जब तक भारत की धरती पर चलती रहेंगी, सनातन का ध्वजा पताका कभी झुकने नहीं पाएगा। सनातन की ध्वजा पताका ऊंची रहेगी तो भारत का कोई बाल बांका नहीं कर पाएगा। हमने धर्म को केवल पूजा तक सीमित नहीं रखा। उसे जीवन शक्ति के रूप में माना है।

मुख्यमंत्री ने 25 मिनट तक संबोधन किया और उसके बाद कथा का रसपान किया। इस दौरान 50 मिनट तक मुख्यमंत्री की कथा स्थल पर उपस्थिति रही। इससे पूर्व खाद्य एवं रसद मंत्री डा. मनोज कुमार पांडेय ने परिवारजन के साथ मुख्यमंत्री को प्रतीक चिन्ह व अंग वस्त्र भेंट किया। मुख्यमंत्री के आयोजन को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे।

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