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रायबरेली में एक ही परिवार के तीन लोगों को जिंदा जलाने का प्रयास, एक की मौत; तमाशबीन बनी रही पुलिस

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में एक ही परिवार के तीन लोगों को जिंदा जलाकर मारने का प्रयास किया गया। जिसमें पिता व बेटे की हालत गंभीर बनी हुई है वहीं मां की इलाज के दौरान मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार पीड़ितों का एक सप्ताह पहले गांव के ही किसी युवक से विवाद हुआ था। पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

By Jagran News Edited By: Abhishek Pandey Wed, 10 Jul 2024 01:39 PM (IST)
अस्पताल में मामले की जानकारी करती पुलिस

जागरण संवाददाता, रायबरेली। मिल एरिया के बंदीपुर गांव में मंगलवार की रात मामूली विवाद में एक परिवार को जलाकर मारने का प्रयास किया गया। दंपति व उनका बेटा गंभीर रुप से झुलस गए। शोर सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने मामले की सूचना पुलिस को दी। तीनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां महिला की मौत हो गई।

गांव निवासी रामअवध, उनकी पत्नी प्रीति व 10 वर्षीय बेटा दीपांशु देर रात दरवाजे बंदकर सो रहे थे। इसी बीच संदिग्ध हालात में आग से तीनों जलने लगे। चीख पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने किसी तरह आग बुझाई। इसकी सूचना थानेदार को दी, लेकिन काफी देर तक जब कोई नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों ने तीनों को जिला अस्पताल पहुंचाया।

युवक से एक सप्ताह हुआ था विवाद

ग्रामीणों ने बताया कि रामअवध का गांव के ही एक युवक से एक सप्ताह पूर्व विवाद हुआ था। इसी वजह से परिवार को जलाकर मारने की बात सामने आ रही है। राम अवध की हालत नाजुक बनी हुई है।

वहीं रामअवध की मां ने बताया कि पूर्व में भी आरोपितों ने कुल्हाड़ी से हमला किया था। पुलिस से शिकायत भी गई थी। आरोप लगाया कि आरोपितों ने पांच दिन पहले जान से मारने की धमकी दी थी। रात को बेटा बहू व नाती को जला कर मारने का प्रयास किया। जिसमें बहू की मौत हो गई।

मामले को दबाने का प्रयास कर रही पुलिस

परिवार के तीन लोगों को जलाकर मारने के गंभीर मामले को पुलिस दबाने का प्रयास कर रही। मिल एरिया के थानेदार संजय सिंह ने बताया कि घटना की सूचना के बाद रात में मौके पर गए थे। घायल कुछ भी बताने से मना किया है। घायल राम अवध ने किसी पर आरोप नहीं लगाया है।

जमीन पर कराहते रहे घायल

जिला अस्पताल में आग से झुलसी प्रीती जमीन पर ही कराहती रही पुलिस कर्मी मौके पर खड़े रहे। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को लेकर लोगों ने रोष है। लोगों का कहना है कि रात के समय मरीजों को जिला अस्पताल में देखने वाला कोई नहीं रहता। आग से झुलसे पीडितों को को स्टेचर नहीं दिया गया। काफी देर बाद उनको वार्ड में शिफ्ट कराया गया।

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