मंकी पाक्स खतरे से प्रशासन अलर्ट, जिला अस्पताल में बना वार्ड

रायबरेली : कोरोना महामारी के बीच एक आऊर संक्रमण ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से मंकी पाक्स को लेकर चेतावनी जारी की गई है। ऐसे में शासन-प्रशासन भी सतर्क हो गया है। बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित एनआइसी में मंकी पाक्स को लेकर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। साथ ही गाइड लाइन भी जारी की गई है। वहीं, जिला अस्पताल में एक वार्ड भी तैयार कर दिया गया है। छह बेड के इस वार्ड में रोगी मिलने की दशा में सारे इंतजाम कर दिए गए हैं। हालांकि अभी तक जिले में एक भी केस नहीं मिला है। कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग का कड़ा इम्तिहान देना पड़ा। वर्तमान में संक्रमण का प्रभाव काफी कम हो गया है। वहीं अब मंकी पाक्स का खतरा मंडराने लगा है। डब्ल्यूएचओ की ओर से अलर्ट जारी होने के बाद प्रदेश सरकार भी सतर्क हो गई है। शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। चिकित्सकों का कहना है कि मंकी पाक्स एक स्व-सीमित संक्रमण है, जिसके लक्षण सामान्यतः दो से चार सप्ताह में समाप्त हो जाते हैं। इसका वायरस पशुओं से मनुष्य में और मनुष्य से मनुष्य में भी फैल सकता है। यह वायरस कटी-फटी त्वचा, आंख, नाक या मुंह के माध्यम से शरीर मे प्रवेश करता है। यह संक्रमित पशु से मानव में, खरोंच, एवं घाव से सीधे अथवा अप्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से हो पहुंच सकता है। मंकी पाक्स के लक्षण - तेज बुखार आना। - पीठ और मांसपेशियों में दर्द। - त्वचा पर दानें और चकत्ते पड़ना। - खुजली की समस्या होना। - गला खराब होना और बार-बार खांसी आना। मंकी पाक्स का जिले में अभी कोई खतरा नहीं है। आइसोलेशन वार्ड में 12 बेड हैं। इन्हीं में से कुछ बेड मंकी पाक्स के खतरे को देखते हुए तैयार किए गए हैं। संक्रमण को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। डा. महेंद्र मौर्या, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल

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