कौन हैं PCS सत्यम मिश्र? जो बने काशी विश्वनाथ मंदिर के नए सीईओ, महाकुंभ में भी निभाई थी अहम जिम्मेदारी
पीसीएस अधिकारी सत्यम मिश्र को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर एवं विशिष्ट क्षेत्र विकास परिसर वाराणसी का सीईओ नियुक्त किया गया है।

HighLights
सत्यम मिश्र श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के नए सीईओ नियुक्त।
प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के प्रोटोकॉल की जिम्मेदारी संभाली।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए सम्मानित।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर एवं विशिष्ट क्षेत्र विकास परिसर वाराणसी के सीईओ पद तैनात किए गए पीसीएस अधिकारी सत्यम मिश्र ने प्रयाराज में भी अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं। आइए जानते हैं उनका पूरा प्रोफाइल-
महाकुंभ 2025 के शुभारंभ के लगभग एक हफ्ते पहले स्थानांतरित होकर प्रयागराज में एडीएम सिटी बनकर आए वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी सत्यम कुमार मिश्र ने अहम जिम्मेदारी निभाई थी। उन्हें प्रोटोकाल का महत्वपूर्ण प्रभार दिया गया था।
उन्होंने महाकुंभ के दौरान देश भर से आए लगभग एक लाख 27 हजार विशिष्ट अतिथियों के स्टेशन-एयरपोर्ट से मेला क्षेत्र में पहुंचवाने से लेकर वहां रुकने और फिर संगम स्नान कराने तक के सेवा कार्य की उन्होंने पूरी जिम्मेदारी उठाई।
कौन हैं सत्यम मिश्र?
हरदोई के मूल निवासी सत्यम मिश्र वर्ष 2015 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। प्रयागराज के पहले वह मुरादाबाद में एडीएम वित्त एवं राजस्व के पद पर थे। उनका स्थानांतरण वर्ष 2025 में सात जनवरी को प्रयागराज हुआ था। वह ऐसे मौके पर प्रयागराज भेजे गए थे कि ठीक छह दिन बाद 13 जनवरी से महाकुंभ का शुभारंभ होने वाला था।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर एवं विशिष्ट क्षेत्र विकास परिसर वाराणसी के सीईओ पद पर स्थानांतरित हुए सत्यम मिश्र कई जिलों में एसडीएम भी रह चके हैं। रामपुर में एसडीएम सदर पद पर रहते हुए उन्होंने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया था।
व्यवहार कुशल अधिकारी के रूप में जाने वाले सत्यम मिश्र की पढ़ाई लखनऊ में हुई है। महाकुंभ के सफल आयोजन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्यम मिश्र को भी सम्मानित किया था।
पीड़ित को पहले पहनाया नया कपड़ा फिर सुनी फरियाद
एडीएम सिटी सत्यम मिश्र 21 जुलाई को कलेक्ट्रेट स्थित संगम सभागार में जनता दर्शन कार्यक्रम में थे। उसी समय सोरांव के भोपतपुर गांव के देवीलाल अपनी पत्नी और बेटियों के साथ पहुंचे। देवीलाल के पास न कोई प्रार्थना पत्र था और न ही कोई पैरवी करने वाला ही था।
एडीएम सिटी ने देवीलाल को भीगा हुआ देखा तो पास बुलाया। उसकी व्यथा सुनकर फौरन नए कपड़े मंगवाए। देवीलाल को कपड़ा पहनाने के बाद शिकायत सुनीं। देवीलाल को परिवार के लोगों ने ही धान की नर्सरी लगाने के दौरान मारापीटा था।
