विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यूपी में बर्खास्त शिक्षकों के सर्टिफिकेशन वेरिफिकेशन के दौरान पाए गए फर्जी, रोल नंबर में भी हेरफेर

Published: Thu, 28 May 2026 02:00 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में यूपीटीईटी के फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे शिक्षकों की बर्खास्तगी जारी है। सीतापुर में ...और पढ़ें

बर्खास्त शिक्षकों के प्रमाणपत्र सत्यापन में पाए गए फर्जी। AI जेनेरेटेड फोटो

बर्खास्त शिक्षकों के प्रमाणपत्र सत्यापन में पाए गए फर्जी। AI जेनेरेटेड फोटो

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

अवधेश पाण्डेय, प्रयागराज। देवरिया, आगरा, आजमगढ़, मुजफ्फरनगर, कौशांबी सहित कुछ अन्य जिलों के बाद अब सीतापुर में उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के कूटरचित प्रमाणपत्र तैयार कर शिक्षक बनने की पुष्टि बर्खास्तगी के साथ दुबारा कराए गए सत्यापन में भी हुई है।

सीतापुर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने शिकायत मिलने पर बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में नियुक्त सात शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) कार्यालय को भेजा था।

सत्यापन में सभी प्रमाणपत्र फर्जी/कूटरचित पाए गए। पांच शिक्षकों ने जिस अनुक्रमांक के टीईटी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए हैं, उसे पीएनपी ने आवंटित ही नहीं किया था। दो अन्य अभ्यर्थियों ने जिस अनुक्रमांक का प्रमाणपत्र संलग्न किया है, वह दो अन्य अभ्यर्थियों को आवंटित थे।

गोंडा के पांच शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्रों का भी सत्यापन किया जा रहा है, जिसके फर्जी होने की आशंका है। पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सीतापुर बीएसए की ओर से भेजे गए सात शिक्षकों के वर्ष 2013-2014 के टीईटी के प्रमाणपत्रों का गणक पंजिका (टेबुलेशन रजिस्टर यानी टीआर) से मिलान कराया गया था।

बीएसए के पत्र के आधार पर दुबारा अभिलेखों से मिलान कर रिपोर्ट पीएनपी रजिस्ट्रार विपेन्द्र सिंह की ओर से भेजी गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि कुमारी कुसुमलता के टीईटी प्रमाणपत्र पर जो अनुक्रमांक अंकित है, वह उसे नहीं, बल्कि अर्चना देवी को आवंटित था और वह 44 अंक प्राप्त कर अनुत्तीर्ण थी।

इसी तरह मनीष सिंह के प्रमाणपत्र पर अंकित अनुक्रमांक देवेन्द्र पाल सिंह को आवंटित किया था, जो कि 93 अंक पाकर उत्तीर्ण थे। कुमारी पूजा व विवेक कुमार (पिता का नाम एक होने के आधार पर भाई-बहन), मुरारीलाल रावत एवं जय नारायण सिंह के टीईटी प्रमाणपत्र पर जो अनुक्रमांक अंकित हैं, वह पीएनपी के अभिलेख में दर्ज नहीं है। यानी पीएनपी ने इसे आवंटित ही नहीं किया था। इस तरह सभी प्रमाणपत्र कूटरचित हैं।

इसके अलावा गोंडा बीएसए द्वारा भेजे गए पांच शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्रों का सत्यापन पीएनपी सचिव करा रहे हैं। ऐसी आशंका है कि कुछ अन्य जनपदों में भी फर्जी प्रमाणपत्र पर शिक्षक नौकरी कर रहे हैं।

सीतापुर में अब तक बर्खास्त हो चुके हैं 24 शिक्षक

सीतापुर जिले में टीईटी के फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे शिक्षक की नौकरी पाने वाले अब तक 24 शिक्षक बर्खास्त हो चुके हैं। हालांकि, यह प्रमाणपत्र कहां से बनवाए गए थे, यह सवाल अब भी बना हुआ है। बर्खास्त शिक्षकों की नियुक्ति फरवरी 2024 में हुई थी।

इनके अभिलेखों का सत्यापन कराया गया तो जांच में टीईटी प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे। उसके बाद निलंबन कर एफआइआर दर्ज कराई गई थी। मार्च 2026 में इन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। जिले में करीब 1100 शिक्षकों को सहायक अध्यापक पद पर तैनाती मिली थी। इनके अभिलेखों का सत्यापन कराया गया था।

यह भी पढ़ें- रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार मामले में CBI के रडार पर कई वित्तीय सलाहकार, जांच के लिए दिल्ली से बुलाई गई टीम

यह भी पढ़ें- उन्नाव में युवक की हत्या के दो आरोपी दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा