TGT 2022 Bharti : टीजीटी अंग्रेजी-हिंदी के अभ्यर्थियों को करना पड़ा लंबा इंतजार, चार साल बाद अब मिलेगी नियुक्ति
TGT 2022 Bharti टीजीटी अंग्रेजी और हिंदी के 1114 चयनित अभ्यर्थियों को चार साल के लंबे इंतजार के बाद अब ...और पढ़ें

उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज।
HighLights
वर्ष 2022 में हुआ था टीजीटी के पदों का विज्ञापन, न्यायालय में प्रकरण जाने से हुई देरी
टीजीटी के 17735 पदों पर सामाजिक विज्ञान के अभ्यर्थी स्नातक में विषय बाध्यता से परेशान
राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। TGT 2022 Bharti शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से प्रशिक्षित स्नातक (विज्ञापन संख्या-01/2022) में विज्ञापित कुल 3539 पदों के सापेक्ष हिंदी और अंग्रेजी विषय के चयनित 1114 अभ्यर्थियों के नतीजे 16 अक्टूबर को जारी किए गए। दोनों विषयों में चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को संस्था आवंटित करने के लिए अब पैनल जारी कर दिया गया है। इससे पूर्व अभ्यर्थियों के शैक्षिक अभिलेखों के जांच की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
भर्ती को पूरे होने में करीब 4 वर्ष लग गए
इस भर्ती को पूरे होने में करीब चार वर्ष लग गए। शिक्षा सेवा चयन आयोग के पीआरओ संजय सिंह के अनुसार हिंदी और अंग्रेजी विषय के लिए नियमावली 1998 के नियम 12 (8) के अनुसार संस्था आवंटित कर आयोग ने विषयवार पैनल जारी किया है। चयनित अभ्यर्थी पैनल आयोग की अधिकारिक वेबसाइट www.upessc.up.gov.in पर देख सकते हैं।
क्यों लटकी यह भर्ती?
TGT 2022 Bharti इस भर्ती के लटकने का मुख्य कारण परीक्षा में पाठ्यक्रम से बाहर का प्रश्न पूछा जाना रहा। लिखित परीक्षा में अभ्यर्थियों को कुल 125 प्रश्नों के उत्तर देने थे लेकिन अभ्यर्थियों ने प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर का होने की बात कहते हुए न्यायालय की शरण ली थी। प्रतियोगियों ने कई प्रश्नों को गलत भी बताया था। अंग्रेजी और हिंदी विषयों के प्रश्नों, अंतिम उत्तरकुंजी तथा पुनर्मूल्यांकन को लेकर लंबे समय तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। परीक्षा के दौरान बहुत से अभ्यर्थियों ने ओएमआर शीट में अनुक्रमांक, विषय या अन्य विवरण भरने में गलती की जिससे उनके ओएमआर रद हो गए थे, इसे लेकर हुए विवाद से भी प्रक्रिया प्रभावित हुई।
स्नातक विषय की बाध्यता से छात्र परेशान
शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से विज्ञापन संख्या-07/2026 के तहत टीजीटी के 17735 पदों के लिए जारी विज्ञापन में सामाजिक विज्ञान विषय से आवेदन करने वाले अभ्यर्थी स्नातक में विषय की बाध्यता से परेशान हैं। अभ्यर्थियों को इतिहास, भूगोल, राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र में से किन्हीं दो विषयों के साथ स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य है।
अभ्यर्थियों ने आयोग को भेजा पत्र
समाजशास्त्र, शिक्षाशास्त्र या अन्य विषयों को इस संयोजन में मुख्य चार विषयों (इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र) में से दो के रूप में शामिल नहीं माना गया है। कुछ अभ्यर्थियों ने शिक्षा सेवा चयन आयोग को इस संबंध में पत्र भेजा है। कहा है, सामाजिक विज्ञान विषय जैसे इतिहास, भूगोल, नागरिकशास्त्र, अर्थशास्त्र में स्नातक में दो विषय का होना अनिवार्य होता है। उसी से फार्म भरा जाता है।
विषय चुनने का विकल्प नहीं
पिछले वर्षों जो भर्तियां हुई हैं, उसी के आधार से चार विषय (सामाजिक विज्ञान) में से दो विषय में से फार्म भर सकते थे लेकिन इस बार स्नातक अंतिम वर्ष जिस विषय से हैं, उसी से फार्म भरा जा रहा है। विषय चुनने का विकल्प नहीं मिल रहा है। प्रतियोगियों ने आग्रह किया है, स्नातक के सामाजिक विज्ञान के चारों विषय में से किसी भी दो विषय से फार्म भरने की अनुमति मांगी है।
