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उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने व्यक्तिगत कारणों से नहीं दिया था त्यागपत्र, लिया गया था

By Jagran News Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 08 Jan 2026 08:55 PM (IST)

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय का त्यागपत्र व्यक्तिगत कारणों से नहीं, बल्कि परीक्षा ...और पढ़ें

उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग की अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय के त्यागपत्र मामले में नया तथ्य सामने आया है।

उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग की अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय के त्यागपत्र मामले में नया तथ्य सामने आया है।

HighLights

  1. परीक्षा में धांधली पर दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच के उदेश्य से लिया गया था त्यागपत्र

  2. असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में सामूहिक नकल के गंभीर आरोप लगे।

राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की विज्ञापन संख्या-51 के तहत हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर निरस्त किए जाने के साथ ही तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय के त्यागपत्र मामले में नया तथ्य सामने आया है।

त्यागपत्र लिया गया था  

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी निर्देश में बताया गया है कि परीक्षा में धांधली एवं अवैध धनवसूली के आरोप में एसटीएफ द्वारा तीन लोगों को गिरफ्तार कर दर्ज कराए गए मुकदमे की जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित रखने के उद्देश्य से तत्कालीन अध्यक्ष का त्यागपत्र लिया गया था। इसके विपरीत 26 सितंबर 2025 को विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी की ओर से जारी पत्र में लिखा गया था कि प्रो. कीर्ति पांडेय द्वारा व्यक्तिगत कारणों से 22 सितंबर को दिया गया त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया है।


आयोग की भर्ती में पहली बार परिणाम को बनाई थी कमेटी

असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों की यह लिखित परीक्षा कराए जाने के साथ ही इसकी गोपनीयता और शुचिता प्रभावित होने के आरोप लगे थे। यही कारण था कि शासन ने इस भर्ती की ओएमआर शीट के मूल्यांकन एवं आगे के कार्यों में शिक्षा सेवा चयन आयोग का सहयोग करने के नाम पर चार सदस्यीय कमेटी बनाई थी।

कमेटी के सदस्यों में ये लोग थे शामिल 

कमेटी में प्रयागराज के एडीएम सिटी सत्यम मिश्र, पुलिस भर्ती बोर्ड की एडिशनल एसपी गीतांजलि सिंह, एसटीएफ के एडिशनल एसपी विशाल विक्रम सिंह एवं उच्च शिक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक अजीत कुमार सिंह थे। कमेटी के सदस्यों की निगरानी में मूल्यांकन कार्य कराकर चार सितंबर 2025 को लिखित परीक्षा का परिणाम जारी किया गया। इसी के साथ साक्षात्कार का कार्यक्रम भी घोषित किया था। दो चरणों में साक्षात्कार 25 सितंबर से चार नवंबर तक कराया जाना था, लेकिन हो नहीं सका। 

अभ्यर्थियों ने सामूहिक नकल शिकायत सीएम से की थी 

इस भर्ती की लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित किए जाने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा में सामूहिक नकल होने की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। इसमें उन अभ्यर्थियों के अनुक्रमांक की सूची भी दी गई थी, जो क्रमश: के क्रम में साक्षात्कार के लिए सफल घोषित किए गए थे। आरोप लगाया था कि शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अपने लोगों को लाभ पहुंचाने की नीयत से परीक्षा में जानबूझकर रेंडमाइजेशन प्रक्रिया का पालन नहीं किया था। यही कारण था कि सीरियल नंबर के क्रम में दो से लेकर चार-चार तक अभ्यर्थी सफल हुए थे। ऐसे करीब डेढ़ सौ मामले थे।

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