UP में बेसिक स्कूलों की पर्यावरण पुस्तक में बदलाव, 5वीं के बच्चे पढ़ेंगे अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल का पाठ
उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में पांचवीं कक्षा की पर्यावरण पुस्तक 'हमारा अद्भुत संसार' में बदलाव किए गए हैं। अब ...और पढ़ें
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HighLights
पांचवीं की पर्यावरण पुस्तक 'हमारा अद्भुत संसार' में बदलाव।
अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल का पाठ शामिल।
पारंपरिक वस्त्रों और अशोक स्तंभ की जानकारी भी मिलेगी।
अमलेन्दु त्रिपाठी, प्रयागराज। प्रदेश के बेसिक स्कूलों में पांचवीं कक्षा में पर्यावरण विषय में हमारा अद्भुत संसार पुस्तक पढ़ाई जाती है। यूं तो यह पुस्तक एनसीईआरटी की है लेकिन राज्य शिक्षा संस्थान इसे उत्तर प्रदेश के संदर्भ में संशोधित कर रहा है। अब विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में पहुंचने वाले पहले वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल के बारे में पढ़ाया जाएगा।
पुस्तक में कुल दस अध्याय हैं। 10वें पाठ पृथ्वी हम सब का घर में नीला ग्रह का उल्लेख है। यही पाठ छात्र-छात्राओं को ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ल से परिचित कराने वाला है। विद्यार्थी जानेंगे कि ग्रुप कैप्टन का जन्म 10 अक्टूबर 1985 को लखनऊ में हुआ। अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के बाद उनके विचार से अध्याय की शुरुआत है- पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने पर पहला विचार मन में यह आता है कि यह पूरी तरह से एक है। इसकी कोई सीमा बाहर से दिखाई ही नहीं देती है।
ऐसा लगता है कि ना तो सीमा अस्तित्व में है और ना ही कोई राज्य अथवा देश। हम सभी मानवता का हिस्सा हैं, पृथ्वी हमारा घर है और हम सभी इसमें एक साथ मिल जुलकर रहते हैं। यही विचार भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से व्यक्त किए थे। पाठ में बताया गया है कि जब उनसे पूछा गया कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है तो उन्होंने कहा- सारे जहां से अच्छा।
इसके अतिरिक्त हमारा जीवंत देश पाठ में बच्चों को पीठ से पीठ सटा कर चारों दिशाओं की ओर मुख करके खड़े शेर वाले प्रतीक चिह्न से भी परिचित कराया गया है। पाठ संख्या आठ वस्त्र-वस्तुएं कैसे निर्मित होती हैं? में भी बदलाव है। इसमें छात्र छात्राएं तमिलनाडु में कांजीवरम, कश्मीर में पश्मीना, ओडिशा और गुजरात में इकत (बुनाई की प्राचीन परंपरा) तथा उत्तर प्रदेश में बनने वाली बनारसी साड़ी के बारे में जानेंगे।
नए सत्र से नई पाठ्य सामग्री के साथ मिलेगी पुस्तकराज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य राजेंद्र प्रताप का कहना है कि एनसीईआरटी की किताबें बेसिक स्कूलों में पढ़ाई जा रही हैं। उनमें आवश्यकता के अनुसार उत्तर प्रदेश के संदर्भ में बदलाव किया जाता है। पांचवीं कक्षा में पर्यावरण विषय में हमारा अद्भुत संसार बदलाव के साथ नए सत्र अर्थात 2027 में यही किताब छात्र छात्राओं के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेगी।
