SSC Suchita App : 500 किमी से दूर परीक्षा केंद्र चुना तो एसएससी को आगाह करेगा सुचिता एप, बड़े काम का है ये App
SSC Suchita App एसएससी (कर्मचारी चयन आयोग) ने परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के लिए सुचिता एप लॉन्च किया है। प्रयागराज ...और पढ़ें

SSC Suchita App एसएससी परीक्षा पारदर्शिता लाने व संदिग्ध गतिविधियों पर सुचिता एप नजर रखेगा।
HighLights
एसएससी मध्य क्षेत्र प्रयागराज की ओर से तैयार सुचिता एप सभी क्षेत्रीय केंद्रों पर किया लागू
विशेष एनोमली डैशबोर्ड से केंद्र, परीक्षक और परीक्षार्थी स्तर पर गड़बड़ी का तुरंत लेंगे पता
राज्य ब्यूरो जागरण, प्रयागराज। SSC Suchita App कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) ने भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आयोग के प्रयागराज स्थित मध्य क्षेत्र की ओर से विकसित ‘सुचिता एप’ को अब देशभर के सभी क्षेत्रीय केंद्रों पर लागू कर दिया गया है।
अभ्यर्थी, परीक्षा केंद्र व अधिकारियों का डेटा एक जगह
SSC Suchita App हालांकि प्रयोग के तौर पर इसे सीजीएल-2025 में प्रयोग किया गया था, अब पूर्णरूप से इसको प्रभावी रुप से लागू किया गया है। इसका फायदा यह होगा कि डिजिटल प्रणाली के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अभ्यर्थियों, परीक्षा केंद्रों और परीक्षा अधिकारियों का समेकित डेटा एक ही प्लेटफार्म पर उपलब्ध रहेगा। इसकी विशेषता इसकी पूर्ण स्वदेसी तकनीक है। एआइ और ब्लाकचेन आधारित ऐप केंद्र की दूरी, परीक्षार्थी का पुराना रिकार्ड सबका विश्लेषण कर अलर्ट जारी करेगा।
संदिग्ध गतिविधि तुरंत चिह्लित हो जाएगी
SSC Suchita App सुचिता प्लेटफार्म पर अब तक दो करोड़ तीन लाख 874 अभ्यर्थियों का डेटा अपलोड किया जा चुका है। यह डेटा सेट सभी क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा साझा रूप से उपयोग किया जा रहा है, जिससे परीक्षा से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान आसान हो गया है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत चिन्हित किया जा सकता है।
एसएससी मध्य क्षेत्र निदेशक ने बताई विशेषता
SSC Suchita App मध्य क्षेत्र के निदेशक डाॅ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्लेटफार्म की प्रमुख विशेषता इसका एनोमली डैशबोर्ड है, जो परीक्षा से जुड़े असामान्य पैटर्न को स्वतः पहचान लेता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी अभ्यर्थी के स्थायी और वर्तमान पते में असामान्य अंतर हो या परीक्षा केंद्र उसके पते से 500 किलोमीटर से अधिक दूरी पर हो, तो सिस्टम उसे तुरंत फ्लैग कर देता है।
एसएससी एहतियाती उपाय अपना सकेगा
उन्होंने बताया कि इसी तरह भौगोलिक (जियोग्राफिकल) डेटा के आधार पर भी असामान्यताओं की पहचान की जाती है। आवेदन में अलग-अलग स्थानों जैसे जम्मू, अंडमान निकोबार, पटना, रांची या मोहाली से जुड़ी जानकारी संदिग्ध प्रतीत होती है तो उसे जांच के लिए चिह्नित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर अंडमान निकोबार से कोई छात्र कोलकाता केंद्र पर परीक्षा देने के स्थान पर मोहाली में परीक्षा का विकल्प चुनता है तो एनामली डैशबोर्ड सक्रिय हो जाएगा। इससे एसएससी एहतियाती उपाय अपना सकेगा।
सिस्टम अभ्यर्थी-कर्मचारी को तुरंत फ्रीज कर देता है
यही नहीं छात्र ने पहले कोई परीक्षा दे चुका है तो उसके पैटर्न का अध्ययन कर जानकारी फ्लैग कर देगा। इसके माध्यम से परीक्षा से जुड़े सभी परीक्षा फंक्शनरी जैसे कक्ष निरीक्षक, केंद्र अधीक्षक और अन्य कर्मचारियों का डेटा डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है। कई बार केंद्र पर कक्ष निरीक्षक बना व्यक्ति परीक्षा में आवेदन भी किया होता है। यदि ऐसी स्थिति सामने आती है तो सिस्टम उस अभ्यर्थी या कर्मचारी को तुरंत फ्रीज कर देता है और आगे की जांच शुरू कर दी जाती है।
आवश्यक संयुक्त डेटा तुरंत उपलब्ध हो जाता है
इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि एक अभ्यर्थी एक ही परीक्षा के लिए एक से अधिक आवेदन न कर सके। किसी भी शिकायत या संदिग्ध मामले की जांच के लिए आवश्यक संयुक्त डेटा तुरंत उपलब्ध हो जाता है।
