कौशांबी की शिक्षिका शालिनी कुशवाहा को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, नवाचारों से बदली बच्चों की तकदीर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कौशांबी की शिक्षिका शालिनी कुशवाहा को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया।
-1792581155470_m.webp)
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा सम्मानित होतीं शिक्षिका शालिनी कुशवाहा।
HighLights
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शालिनी कुशवाहा को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया।
औषधि पार्क, कुम्हार के चाक, बैंक भ्रमण से व्यावहारिक शिक्षा दी।
122 बच्चों को जूते-मोजे दिलाकर संवेदनशीलता का परिचय दिया।
राजकुमार श्रीवास्तव, प्रयागराज। कौशांबी के कंपोजिट विद्यालय रसूलाबाद कोइलहा की शिक्षिका शालिनी कुशवाहा ने अपने नवाचारों से पढ़ाई को किताबों और कक्षा की चहारदीवारी से बाहर निकालकर जीवन के अनुभवों से जोड़ दिया है। उनकी पहल से बच्चे औषधि पार्क में पर्यावरण व प्राकृतिक चिकित्सा, कुम्हार के चाक के पास मिट्टी कला और बैंक में लेनदेन की व्यावहारिक जानकारी सीख रहे हैं।
सीखने में पीछे रहने वाले बच्चों को आगे बढ़ाने और उनकी जरूरतों के अनुरूप शिक्षण की पहल ने शालिनी को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया।
वह कहती हैं जब अधिकार मिलता है तो उसके साथ जिम्मेदारी स्वत: चली आती है। जब 122 बच्चों को नंगे पैर विद्यालय आते देखा तो उनके पैरों में जूते पहनाने को उन्होंने अपनी जिम्मेदारी माना और अपने स्तर से इसे उपलब्ध कराया। इससे बच्चों के चेहरे पर जो मुस्कान आई, उसने उनके प्रयास को सार्थक कर दिया।
वह किताबी ज्ञान देने के साथ व्यावहारिक ज्ञान देने की पक्षधर हैं, जिसने उन्हें और शिक्षको से अलग पहचान दिलाई। वह समय-समय पर बच्चों को विद्यालय के सामने स्थित चंद्र शेखर आजाद आयुर्वेद चिकित्सालय ले जाती हैं, जहां औषधीय गुणों से युक्त पौधे लगे हैं। वहां बच्चों को तुलसी के औषधीय गुण, चोट लगने पर हल्दी का प्रयोग करने के लाभ के अलावा प्रकृति और पर्यावरण के गहरे संबंध को समझाती हैं। इससे बच्चे ‘आओ करके सीखें’ की भावना में मामूली चोट के उपचार करने की तरीके, तुलसी के लाभकारी गुण से परिचित हो रहे हैं।

एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) का दायित्व निभाने के कारण वह लालापुर उच्च प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को गांव में ही कुम्हार की चाक दिखाने ले गईं। भ्रमण के दौरान कक्षा सात की छात्राएं अंकिता और पायल व आठ के छात्र रविंद्र ने उसी चाक पर कुल्हड़ एवं दीये बनाए थे। वह बच्चों को बैंक का भ्रमण भी कराती हैं। यह विचार उनके मन में इसलिए आया, क्योंकि कुछ बच्चों के अभिभावक पढ़े-लिखे नहीं होते हैं।
उनकी जानकारी में एक प्रकरण ऐसा आया कि अभिभावक से ज्यादा पैसे भरवाकर रुपये निकाल लिए गए। ऐसे में बच्चे लेनदेन एवं बैंकिंग गतिविधियों को जानते रहेंगे तो वह बैंक से लेनदेन में अपने अभिभावकों का सहयोग कर सकेंगे। वह खेल गतिविधियों से विषय को जब पढ़ाती हैं तो बच्चों को पढ़ृाई खेल की तरह लगती है और अच्छी तरह समझ पाते हैं। इसके लिए वह आइसीटी (इंफार्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नालाजी) का भी सहयोग लेती हैं। उनके इन नवाचारों ने उन्हें वराष्ट्रपति से सम्मान दिलाया।
