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पूर्व MLA रामकरन आर्य की उम्रकैद 10 साल के कठोर कारावास में बदली, शंभूशरण पाल हत्याकांड में इलाहाबाद HC का फैसला

Published: Sat, 24 Oct 2026 08:42 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बस्ती के शंभूशरण पाल हत्याकांड में पूर्व विधायक राम करन आर्य की आजीवन कारावास की सजा ...और पढ़ें

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HighLights

  1. पूर्व विधायक राम करन आर्य की सजा बदली।

  2. आजीवन कारावास से 10 साल कठोर कारावास।

  3. गैर इरादतन हत्या का मामला माना गया।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बस्ती में 31 साल पुराने चर्चित शंभूशरण पाल हत्याकांड में अभियुक्त पूर्व विधायक राम करन आर्य की आजीवन कारावास की सजा को बदलते हुए उसे गैर इरादतन हत्या में 10 साल के कठोर कारावास में तब्दील कर दिया है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने आपराधिक अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए सरकार की अपील खारिज कर दी है। यह घटना 23 नवंबर 1994 की है। प्राथमिकी के अनुसार सदर क्षेत्र से विधायक जगदंबिका पाल की वाल्टरगंज रैली में जा रहे शंभू शरण पाल की जीप आवास विकास गेट के पास रुकी थी।

पीछे से नगर पूर्व के तत्कालीन विधायक राम करन आर्या अपनी जीप से आए और ब्रेक फेल से हुई हल्की टक्कर को लेकर विवाद हो गया। आरोप था कि राम करन ने साथी से बंदूक छीनकर शंभू शरण की गर्दन में गोली मार दी, जिससे मौत हो गई।

बस्ती की सत्र न्यायालय ने 10 अप्रैल 2017 को राम करन आर्य को आइपीसी की धारा 302 में उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माना तथा 504 और 506 में अतिरिक्त सजा सुनाई थी, जबकि सात अन्य सह-अभियुक्तों राम उजागिर, ओम प्रकाश, उस्मान उर्फ यूसुफ, अमरचंद, संतराम, राम प्यारे, सिपाही रूपेन्द्र कुजूर और बनारसी प्रसाद को बरी कर दिया था।

हाई कोर्ट में बचाव पक्ष ने कहा कि घटना अचानक झगड़े में हुई, पूर्व नियोजित हत्या नहीं थी। एफआईआर एंटी-टाइम है और गवाह राजनीतिक हैं। कोर्ट ने माना कि जीपों की टक्कर के बाद गाली-गलौज और कहासुनी पर आवेश में आकर गोली चली।

कोई पूर्व योजना नहीं थी, न ही अन्य आरोपियों की कोई भूमिका या कॉमन ऑब्जेक्ट साबित हुआ। इसलिए मामला आईपीसी की धारा 300 के अपवाद-4 के दायरे में आता है, यानी आवेश और अचानक झगड़े में किया गया अपराध।

इसलिए कोर्ट ने सजा को 302 से घटाकर धारा 304 पार्ट-एक में 10 साल की सजा में बदल दिया, जुर्माना यथावत रखा। अन्य आरोपियों को बरी करने संबंधी ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए सरकार की अपील खारिज कर दी।

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