रेलवे भर्ती में EWS प्रमाण पत्र को लेकर सख्ती, पक्की नियुक्ति से पहले होगी जांच; फर्जी मिला तो बर्खास्तगी तय
रेलवे बोर्ड ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों की कड़ी जांच के निर्देश जारी किए हैं। अब नियुक्ति से पहले प्रमाण पत्रों ...और पढ़ें

HighLights
रेलवे बोर्ड ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों की कड़ी जांच के निर्देश दिए।
नियुक्ति से पहले सक्षम अधिकारी से प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता जांच होगी।
फर्जी पाए जाने पर तत्काल बर्खास्तगी और आपराधिक केस दर्ज होगा।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। भारतीय रेलवे में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) कोटे के तहत नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों को अब नियुक्ति के समय अपने प्रमाण पत्रों की कड़ी और समयबद्ध जांच से गुजरना होगा।
रेलवे बोर्ड ने यह निर्णय उत्तर रेलवे की विजिलेंस पर्सनल विंग (सतर्कता प्रभाग) द्वारा ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के एक फर्जी मामले के उजागर होने के बाद लिया है। 22 सितंबर को रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों, उत्पादन इकाइयों और सार्वजनिक उपक्रमों के सीएमडी/एमडी को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
10 प्रतिशत आरक्षण लागू
फरवरी 2019 से रेलवे में सीधी भर्तियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू है। पहले चयनित अभ्यर्थियों को औपबंधिक नियुक्ति देकर कार्यभार ग्रहण कराया जाता था, जबकि दस्तावेजों की जांच धीरे-धीरे होती थी।
रेलवे बोर्ड के उप निदेशक (ई/एससीटी-प्रथम) बृजेश कुमार के अनुसार अब, कार्यभार ग्रहण कराने से पहले अभ्यर्थी के ईडब्ल्यूएस आय एवं संपत्ति प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता की जांच संबंधित सक्षम प्राधिकारी (जैसे तहसीलदार, एसडीएम) से अनिवार्य रूप से कराई जाएगी।
नियुक्ति पत्र में यह शर्त जोड़ी जाएगी कि यदि जांच में ईडब्ल्यूएस दावा झूठा या फर्जी पाया गया, तो कर्मचारी को बिना किसी कारण और अतिरिक्त सुनवाई के तुरंत बर्खास्त कर दिया जाएगा। जाली अभिलेख पेश करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
