प्रयागराज में पासर गिरोह का मकड़जाल, रात में नये यमुना पुल पर वसूली; गलत दिशा से वाहनों की आवाजाही से राहगीरों पर संकट
प्रयागराज में नए यमुना पुल से लेकर तमाम स्थानों पर पासर गिरोह के सदस्य रात में बड़े वाहनों से अवैध ...और पढ़ें

प्रयागराज के नैनी स्थित डंडी में गलत दिशा से जाते वाहन। जागरण
HighLights
पासर गिरोह के सदस्य जबरन करते हैं काम
पुलिस और आरटीओ अफसर बन रहे अनजान
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। नई रात, नया हाल और नया दृश्य। नए यमुना पुल और उसके आसपास के क्षेत्र वाली सड़कों पर अनियंत्रित, अराजक यातायात को नियंत्रित करने की फिलहाल कोई मुकम्मल योजना नजर नहीं आ रही है। रीवा, चित्रकूट, बांदा, मीरजापुर और वाराणसी की तरफ से आने-जाने वाले वाहनों के चालक आधी रात के बाद मनबढ़ हो जाते हैं। वह गलत दिशा से तेज रफ्तार में आवाजाही करते हैं।
वाहनों को जबरन पास कराते हैं
इसी बीच पुल पर रात के अंधेरे में अवैध वसूली का भी खेल चलता है। पासर गिरोह के सदस्य हाईवे से आने वाले वाहनों से वसूली कर जबरन पास कराने का काम करते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस, प्रशासन और आरटीओ के अधिकारी इससे अनजान बने हुए हैं।
इन स्थानों पर गिरोह सदस्यों की सक्रियता
रात में मामा भांजा तालाब, खान चौराहा, लेप्रोसी चौराहा, जेल के सामने, बांगड़ धर्मशाला के आसपास पासर गिरोह के सदस्य सक्रिय हो जाते हैं। कुछ बाइक से तो कई चार पहिया वाहन से ओवरलोड ट्रक, डंपर के आगे-पीछे माहौल और जरूरत के हिसाब से चलते हैं। रास्ते में नीली, लाल बत्ती जलती कोई वाहन जैसे ही दिखाई देता है, वह साइड मार लेते हैं।
कोड वर्ड बताने वाले वाहनों को भेजा जाता है
गिरोह के सदस्य हर रात का कोडवर्ड बोलकर अपना काम करते हैं। दूसरे जनपदों से आने वाले ओवरलोड वाहन का चालक जैसे ही कोडवर्ड बोलता है, उस गाड़ी तो तेजी से आगे निकाल दिया जाता है। जबकि कोडवर्ड नहीं बताने वाले को वाहन चालक को डंडा दिखाकर किनारे लगाने के लिए इशारा किया जाता है। सूत्रों का कहना है कि पासर गिरोह को कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों का संरक्षण प्राप्त है, जो कतिपय जिम्मेदारों पर दबाव बनाकर अपना सिंडीकेट चला रहे हैं।
राहगीरों की जान पर आफत
गुरुवार को नैनी क्षेत्र के अलग-अलग सड़कों पर अराजकता का आलम दिखाई दी। गलत दिशा से तमाम वाहनों की आवाजाही होती रही तो अंधेरे में ओवरलोड वाहनों से वसूली करते गिरोह के सदस्य नजर आए। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिरकार राहगीरों की जान पर आफत और आवागमन की सांसत पर कब विराम लगेगा?
