बिन ब्याही मां बनी युवती हुई विक्षिप्त, पुलिस की लापरवाही पर प्रयागराज के DM ने लिया संज्ञान तो सक्रिय हुए अफसर
प्रयागराज में रेलवे जंक्शन पर एक बिन ब्याही युवती ने बच्चे को जन्म दिया, जिसके बाद वह मानसिक रूप से ...और पढ़ें

प्रयागराज में बिन ब्याही मां की दर्दनाक दास्तां।
HighLights
जिला महिला अस्पताल डफरिन के जिम्मेदार अफसर भी माले को टालते रहे
प्रयगाराज रेलवे जंक्शन पर झारखंड प्रांत की युवती काRPF ने कराया था प्रसव
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। रेलवे जंक्शन पर परिस्थितियों से हारी झारखंड की एक युवती बिन ब्याही मां बन गई, उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। जिला महिला चिकित्सालय 'डफरिन' में भर्ती कराए जाने के बाद उसकी सुरक्षा, देखभाल और परिवार का पता लगाने के बजाए तमाम अफसर अस्पताल कर्मियों को ही टरकाते रहे।
डीएम ने लिया संज्ञान तो हरकत में आए अधिकारी
पुलिस का रवैया पूरे 'सिस्टम' पर सवाल उठाने वाला रहा। जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में युवती को विक्षिप्त बता संरक्षण गृह में भेजे जाने से हाथ खड़े कर दिए गए। 11 दिनों की लंबी लड़ाई के बाद जिलाधिकारी के संज्ञान में मामला पहुंचा तो तमाम विभाग हरकत में आए।
जंक्शन पर सुरक्षित प्रसव आरपीएफ ने कराया
बीते 28 सितंबर को रेलवे जंक्शन पर एक युवती का प्रसव काफी चर्चा में रहा। पैरेंटिंग कोच डॉ. अंकिता राज ने सुरक्षित प्रसव कराने वाली आरपीएफ की महिला उप निरीक्षक को सम्मानित कर इसकी रील इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कराई। युवती और उसके शिशु को डफरिन अस्पताल भेजा गया। परीक्षण के बाद शिशु को प्री-मेच्योर (समय से पहले प्रसव) पाते हुए एसएनसीयू में भर्ती किया गया। जबकि युवती की अवस्था विक्षिप्त पाई गई। वह विवाहिता प्रतीत नहीं हो रही है, हालांकि अपने बच्चे के प्रति उसकी चेतना है और अपना नाम, भाई का नाम, जिला तक बताया। पता चला कि वह झारखंड के गुमला जिला अंतर्गत घाघरा थानाक्षेत्र की रहने वाली है।
पुलिस संवेदना शून्य रही
अस्पताल प्रशासन के अनुसार 29 सितंबर को काल-बुक के जरिए सूचना शाहगंज थाने को दो बार दी गई। 30 सितंबर को पत्र भेजकर बताया गया। फिर भी पुलिस संवेदना शून्य रही तो अस्पताल कर्मी पहुंचे पुलिस कमिश्नरेट के कार्यालय। वहां से यह कहकर टरका दिया गया कि मामला जीआरपी से संबद्ध है, अस्पताल कर्मियों का कहना है कि जीआरपी कार्यालय में यह कहकर टरकाया गया कि उनके पास फिलहाल महिला पुलिस नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने एक न्यायिक मजिस्ट्रेट का दरवाजा खटखटाया। वहां कहा गया कि चूंकि मरीज सामने नहीं है, इसलिए उसे रेलवे के न्यायालय में ही पेश किया जाए। शुक्रवार को युवती को स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय भेजकर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में परीक्षण कराया गया।
वृद्धाश्रम में संरक्षण के लिए युवती को भेजा
पूरे 11 दिनों तक दौड़ लगाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा तक यह बात पहुंचाई। प्रमुख चिकित्साधीक्षक डॉ. सुनीता सागर स्वयं डीएम से मिलीं। इसके बाद डीएम ने संज्ञान लिया और विभाग हरकत में आए। युवती को नैनी स्थित आधारशिला वृद्धाश्रम में संरक्षण के लिए भेजा गया है।
अस्पताल कर्मियों ने ऐसे लड़ी लड़ाई
28 सितंबर-युवती अस्पताल लाई गई
29 सितंबर-थाने में कालबुक भेजी गई
30 सितंबर-थाने में अस्पताल से पत्र भेजा गया
06 अक्टूबर-पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में दी गई सूचना
06 अक्टूबर-न्यायिक मजिस्ट्रेट को दी गई सूचना
08 अक्टूबर-जिलाधिकारी ने मामला संज्ञान लिया
पोस्टपार्टम साइकोसिस से ग्रसित है युवती
मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय के मनो चिकित्सक डॉ. राकेश पासवान का कहना है कि डफरिन अस्पताल से सूचना मिली थी तो युवती का मानसिक परीक्षण करने गए थे। उसे पोस्टपार्टम साइकोसिस है, यह अक्सर प्रसव के बाद हो जाता है। दवाओं के जरिए मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाया जा रहा है।
काफी प्रयास किया गया, थाना से लेकर दूसरे विभागों के बड़े अधिकारी तक मदद और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते रहे। जिलाधिकारी से मुलाकात के बाद युवती के बारे में विभागों ने सुधि ली। फिलहाल उसे वृद्धाश्रम में नैनी भेजा गया है। बच्चा अस्पताल में है।
- डॉ. सुनीता सागर, प्रमुख चिकित्साधीक्षक।
