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पांच वर्ष राज करने पर भी मोहभंग नहीं, नियमों ने छीनी पदवी पर प्रधानी बरकरार, भुगतान में लगा रहे प्रधान के नाम की मुहर

By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Mon, 03 Aug 2026 05:52 PM (IST)

प्रयागराज में पूर्व ग्राम प्रधान कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी प्रशासक के बजाय 'प्रधान' पदनाम से भुगतान बिलों पर ...और पढ़ें

प्रयागराज में पूर्व प्रधानों का पद मोह, प्रशासक बनकर भी 'प्रधान' नाम से कर रहे भुगतान।

प्रयागराज में पूर्व प्रधानों का पद मोह, प्रशासक बनकर भी 'प्रधान' नाम से कर रहे भुगतान।

HighLights

  1. 25 मई को खत्म हो चुका है ग्राम प्रधानों का कार्यकाल

  2. कार्यकाल पूरा होने पर सरकार ने इन्हें प्रशासक बना दिया 

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। पांच साल तक राज करने वाले प्रधानों का ‘प्रधान’ पद के नाम से मोहभंग नहीं हो पा रहा है। कार्यकाल पूरा होने पर सरकार ने इन्हें प्रशासक बना दिया है, लेकिन वह अभी सरकारी दस्तावेजों में प्रधानी का ठप्पा लगा रहे हैं।

30 हजार रुपये के भुगतान, बिल में प्रधान लिखा 

प्रयागराज जिले में गंगापार के ब्लाक बहादुरपुर की ग्राम पंचायत बहादुरपुर तालुके इब्राहिमपुर में तीन दिन पहले पंचायत सहायक के मार्च से लेकर जुलाई महीने तक के मानदेय के 30 हजार रुपये का भुगतान हुआ। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर इस भुगतान में जो बिल लगाया गया है, उसमें सचिव के हस्ताक्षर नहीं है। प्रशासक के हस्ताक्षर हैं, लेकिन यहां प्रशासक की जगह प्रधान लिखा है। 

प्रशासक ने पदनाम प्रधान लिखा, रुपये का भुगतान 

चकिया धरहरा में दो दिन पहले सामुदायिक शौचालय, हैंडपंप, सबमर्सिबल और इन्वर्टर की मरम्मत के लिए 16,965 रुपये का भुगतान हुआ। सामग्री की आपूर्ति करने वाली फर्म के बिल में प्रशासक और सचिव के हस्ताक्षर होने चाहिए और पेड एंड कैंसल की मुहर लगी होनी चाहिए। मुहर कोई लगी रही, प्रशासक ने अपना पदनाम प्रधान लिखा है।

12 हजार रुपये भुगतान में भी यही खेल हुआ  

कौड़िहार ब्लाक के पूरे घासी गांव में पंचायत सहायक के मानदेय के 12 हजार रुपये के भुगतान में भी यही खेल हुआ। पोर्टल पर अपलोड बिल में निवर्तमान प्रधान ने प्रशासन नहीं, बल्कि बतौर प्रधान हस्ताक्षर किए हैं। यह तो महज उदाहरण मात्र हैं। एक तरफ से जिले की सभी 1540 ग्राम पंचायतों में कार्यकाल पूर्ण होने की तारीख 26 मई के बाद हुए भुगतानों की पड़ताल कर ली जाए तो दर्जनों गांव ऐसे मिल जाएंगे।

बोगस बिलिंग का चल रहा खेल

शृंगवेरपुरधाम की पियरी उर्फ बिजलीपुर, सराय दादन, कोरारी उर्फ सरायराह और सेरावां ग्राम पंचायत में बड़े पैमाने पर बोगस बिलिंग हुई है। जून के भुगतानों की जांच से इसकी पोल खुल जाएगी। बजट का अधिक से अधिक खर्च दिखाने के लिए सचिवों ने फर्जी बिल अपलोड करा दिए। कुछ जगह भुगतान भी हुए तो कुछ जगह बाद में बोगस बिल निरस्त कर दिए गए।

मामला संज्ञान में नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। अगर मनमानी सामने आई तो संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होगी।
- हेमचंद्र, प्रभारी डीपीआरओ

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