प्रयागराज: डिग्री कॉलेजों में जलभराव के विरोध में सामने आया AUCTA, सीएमपी में धरने पर बैठे शिक्षक-शिक्षिकाएं
प्रयागराज के डिग्री कॉलेजों में जलभराव के विरोध में AUCTA ने सीएमपी डिग्री कॉलेज में धरना प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने ...और पढ़ें

प्रयागराज के डिग्री कॉलेजों में जलभराव के विरोध में सीएमपी में AUCTA के नेतृत्व में धरने पर बैठे शिक्षक-शिक्षिकाएं। जागरण
HighLights
सीएमपी व जगत तारन डिग्री कॉलेज में बारिश से हुए जलभराव के पीछे नगर निगम को दोषी ठहराया
जलभराव की सबसे खराब स्थिति सीएमपी डिग्री कॉलेज की, यहां एक सप्ताह से कक्षाएं बाधित हैं
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। डिग्री कॉलेजों में जलभराव के विरोध में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों के शिक्षकों ने विरोध शुरू कर दिया है। सोमवार को शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सीएमपी डिग्री कॉलेज में धरने पर बैठे। उन्होंने सीएमपी डिग्री कॉलेज, जगत तारन डिग्री कॉलेज में भारी बारिश के कारण हुए जलभराव के पीछे नगर निगम को दोषी ठहराया।
सीएमपी में शिक्षकों का प्रदर्शन
जलभराव की सबसे खराब स्थिति सीएमपी डिग्री कॉलेज की है, जहां एक सप्ताह से कक्षाएं बाधित हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालयों के शिक्षक संघ (ऑक्टा) ने सीएमपी डिग्री कॉलेज परिसर में लंबे समय से बनी जलभराव की समस्या को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमित्र को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। इसको लेकर शिक्षकों ने सोमवार से प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
सीएमपी के दक्षिणी हिस्से में जलभराव की गंभीर समस्या
ऑक्टा के अध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि बरसात के दौरान सीएमपी डिग्री कॉलेज के दक्षिणी हिस्से में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसका मुख्य कारण दक्षिण दिशा में स्थित प्राकृतिक नाले के मूल स्रोत को बाधित किया जाना बताया गया है। नाले के प्रवाह को रोकने के कारण बरसात का पानी कॉलेज परिसर से बाहर नहीं निकल पाता और कई दिनों तक कैंपस में जलभराव बना रहता है।
विद्यार्थियों की पढ़ाई हो रही बाधित
आरोप लगाया गया है कि पहले जिस नाले की चौड़ाई अधिक थी, उसे पाट दिया गया है। इसके बाद बनाए गए नए नाले की चौड़ाई कम होने से बरसात के दौरान पानी का तेजी से निकास संभव नहीं हो पाता। जलभराव के कारण सीएमपी डिग्री कॉलेज के हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
ऑक्टा पदाधिकारियों ने समाधान की मांग की
ऑक्टा पदाधिकारियों ने इसे केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अनियमितताओं का परिणाम बताया है। पुराने प्राकृतिक नाले की चौड़ाई बढ़ाकर उसकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया है। धरना प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने नाले के प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करने और नए बनाए गए नालों को व्यवस्थित करने की मांग की है।
