काशी, प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार में बनने वाले पंचांगों की गणना अलग क्यों? प्रयागराज के विद्वानों ने उठाए सवाल
प्रयागराज में ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद की स्मृति सभा में विद्वानों ने पंचांगों की गणना में भिन्नता पर चिंता व्यक्त की। ...और पढ़ें

ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के जन्मोत्सव पर प्रयागराज में पूजन करते श्रीधरानंद ब्रह्मचारी व अन्य विद्वान। जागरण
HighLights
कहा गया- मुहूर्तों की भिन्नता दूर करने को पंचांगों की समान हो गणना
ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद की स्मृति सभा में जुटे सनातनी विद्वान
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सनातन धर्म के पर्व और संस्कार मुहूर्त पर आधारित होते हैं। मुहूर्त पंचांग से तय होता है। इधर, पंचांगों की गणना में भिन्नता से पर्वों को लेकर असमंजस रहता है। काशी का पंचांग कुछ कहता है, प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार में बनने वाले पंचांगों की गणना अलग होती है, जिसे ठीक करने की आवश्यकता है। उक्त विचार सनातन धर्म के विद्वानों ने व्यक्त किए।
सनातन धर्म की परंपराओं पर मंथन
ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के 103वें जन्मोत्सव पर श्रीमनकामेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार को आयोजित स्मृति सभा में सनातन धर्म की परंपराओं पर मंथन हुआ। अध्यक्षता कर रहे मंदिर के महांत व द्वारका शारदा पीठ के प्रतिनिधि श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने कहा, जब नौ ग्रह, 27 नक्षत्र तय चाल के अनुरूप स्थान परिवर्तन करते हैं तो उनकी गणना कैसे अलग हो सकती है? इस पर चिंतन जरूरी है।
नक्षत्र किसे कहते हैं?
उन्होंने कहा, आकाश मंडल को 27 भागों में अलग-अलग नाम से बांटा गया है, जिन्हें नक्षत्र कहते हैं। इसके साथ नौ ग्रहों की चाल से खगोलीय स्थिति की गति परितर्वित होती है। सूर्य सिद्धांत, आर्यभट्ट तथा वराहमिहिर के खगोलीय नियमानुसार सबकी गणना करके पंचांग बनता है।
पर्वों को लेकर असमंजस कैसे दूर होगा?
इधर, पंचांगाें की गणना में समानता का अभाव है। इसकी वजह से एक पर्व दो दिन मनाया जाने लगा। इसे लेकर सनातन धर्मावलंबियों में भ्रम रहता है। आचार्य गंगा प्रसाद शुक्ल ने कहा, काशी सहित हर शहर के विद्वानों में समन्वय स्थापित कर इसकी रूपरेखा दिसंबर माह में तय होगी। रोहित पाराशर ने कहा, पंचांगों की गणना में समानता आने पर पर्वों को लेकर असमंजस दूर होगा।
शंकराचार्य स्वरूपानंद का पूजन
सर्वप्रथम 21 आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच शंकराचार्य स्वरूपानंद का पूजन करके धर्महित में उनके योगदान को याद किया गया। महापौर गणेश केसरवानी, विधायक राजमणि कोल, विजय मिश्र, गौरव करवरिया, हिमांशु मिश्र, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, आलोक त्रिपाठी, अनूप त्रिपाठी, राहुल द्विवेदी, गुलाब शंकर तिवारी, राधेश्याम अवस्थी मौजूद रहे।
