Prayagraj Leopard Terror: 6 माह से कछार के 15 गांवों में था खौफ, सूरज ढलने के बाद खेत जाने से कतराते थे ग्रामीण
Prayagraj Leopard Terror:प्रयागराज में तेंदुआ ने छह महीने तक 15 गांवों में दहशत फैलाई। दक्षिणी कोटवा से शुरू हुआ आतंक ...और पढ़ें

प्रयागराज के गंगापार में तेंदुआ के पकड़े जाने के बाद आतंक समाप्त, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस। जागरण
HighLights
गंगापार के कोटवा से शुरू हुए दहशत के सफर पर छिबैया में तेंदुआ पकड़े जाने पर लगा विराम
दक्षिणी कोटवा में सबसे पहले आया था नजर, छतनाग के एचआइआर में दिखी थी अंतिम झलक
कछार के लगभग 15 गांवों में सूरज ढलने के बाद खेतों की तरफ जाने से कतराने लगे थे ग्रामीण
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। Prayagraj Leopard Terror जंगलों की सरहदें पार कर तीर्थराज प्रयाग पहुंचे तेंदुआ ने गंगापार के दक्षिणी कोटवा से अपने दहशत के सफर की शुरुआत करीब छह माह पूर्व की थी। इसके बाद कभी इस गांव तो कभी उस गांव। पेड़ की डाल पर आराम फरमाता तो कभी घरों की छतों पर कुलाचे भरता। कभी दिखता तो कभी पलक झपकते आंखों से ओझल हो जाता।
कई लोगों को जख्मी भी कर चुका था
लगभग 15 किलोमीटर के गंगा के कछार में छह महीने तक उसने राज किया। इस बीच जो उसके सामने आया उसे जख्मी करता रहा। वन विभाग ने कई बार जाल भी बिछाया, लेकिन तेंदुआ पकड़ में नहीं आया था। अफसरों के सारे अनुभव धरे के धरे रह गए और वह खुलेआम घूमता रहा। आखिर में बिना कुछ किए ही तेंदुआ गुरुवार को उनके शिकंजे में आ गया। इसी के साथ उसके आतंक पर भी विराम लग गया।
वन विभाग की टीम नहीं कर सकी थी रेस्क्यू
तेंदुआ को प्रयागराज का कछार खासा रास आ गया था। पिछले करीब छह महीने से वह यहीं पर घूमता रहा। सबसे पहले पांच अगस्त को वह बहादुरपुर के दक्षिणी कोटवा के गंगा कछार में दिखा था। यहां वह एक पेड़ पर चढ़ा बैठा था। इसके पांच दिन बाद मलखानपुर में उसका सामना ग्रामीणों से हो गया। इसमें गांव के राजेंद्र बिंद को जख्मी कर वह फिर निकल भागा। वन विभाग की टीम पहुंची, लेकिन उसे रेस्क्यू नहीं कर सकी।
सीसीटीवी में कैद हुई थी तेंदुआ की तस्वीर
इसके दूसरे दिन 11 अगस्त को सुदनीपुर में रतौरा तालाब के पास लोगों ने उसे घूमते देखा। फिर कई दिनों तक वह आबादी से दूर रहा। तीन सितंबर को कछार से निकल कर सुदनीपुर पहुंचा। भीटेश्वर मंदिर के पास रोड पार करते हुए एक सीसीटीवी में उसकी तस्वीर कैद हुई। महकमा फिर से सक्रिय हुआ। गांव के कछार में पिंजरे लगाए गए। नतीजा सिफर रहा।
वन विभाग को लगातार छकाता रहा
आठ सितंबर को वह कछार से निकला और जमुनीपुर में तारा बिंद पर हमला कर दिया। किसी तरह उसकी जान बची। इसके कुछ दिन बाद दलापुर में उसके नजर आने की चर्चाएं हुई थीं। वन विभाग मौके पर पहुंचा था। वहां उसके कोई प्रमाण नहीं मिले। 11 अक्टूबर को तेंदुआ शहर के और करीब झूंसी के छतनाग आ गया। कई दिनों तक एचआरआइ में घूमता रहा। वन विभाग ने यहां पिंजरे लगाए थे। हालांकि, तेंदुआ यहां कर्मचारियों को दिखता था, लेकिन पिजंरे की तरफ नहीं जाता था।
कछार के 15 गांवों में उड़ी थी ग्रामीणों की नींद
बहादुरपुर के दक्षिणी कोटवा, मलखान, सुदनीपुर, जमुनीपुर, दलापुर, तालीकरपुर, कटरा उपरहार, तिवारीपुर, लीलापुर खुर्द, लीलापुर कला, ढोकरी समेत कछार के 15 किलोमीटर के दायरे में बसे लगभग 15 गांवों में तेंदुए की दहशत थी। लोगों ने सूरज ढलने के बाद घरों से निकलना बंद कर दिया था।
