हनीट्रैप कांड: रेस्ट हाउस के सीसीटीवी और चेक-इन कराने वाले 'साहब' का करीबी कौन था? हो रही तलाश
प्रयागराज रेलवे रेस्ट हाउस में आरपीएफ कमांडेंट हनीट्रैप मामले में सीनियर डीपीओ की आईडी से युवती को चेक-इन कराने वाले ...और पढ़ें

प्रयागराज जंक्शन के रेलवे रेस्ट हाउस से आरपीएफ कमांडेंट से हनीट्रैप के मामले में सवाल उठ रहे हैं।
HighLights
स्थानीय स्तर पर अभी नहीं गठित हुई कोई जांच टीम, सबने साधी चुप्पी
प्रयागराजके रेलवे रेस्ट हाउस से आरपीएफ कमांडेंट से हनीट्रैप मामला
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। आरपीएफ कमांडेंट हनीट्रैप मामले में प्रयागराज जंक्शन स्थित रेलवे रेस्ट हाउस की भूमिका को लेकर अब जांच की सुई तकनीकी साक्ष्यों की ओर मुड़ गई है। सीनियर डीपीओ की सर्विस आईडी से कमरे के आवंटन की चर्चाओं के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आरोपित युवती के साथ कमरे तक कौन पहुंचा था और रिसेप्शन पर औपचारिक चेक-इन किसने कराया।
संबंधित अधिकारी का रेफरेंस रजिस्टर में दर्ज होता है
रेलवे की स्थापित व्यवस्था के मुताबिक, रेस्ट हाउस की बुकिंग ऑनलाइन पोर्टल से होने के बावजूद भौतिक रूप से रिसेप्शन पर चेक-इन कराना अनिवार्य होता है। इसमें संबंधित अधिकारी का रेफरेंस रजिस्टर में दर्ज किया जाता है।
युवती अकेले आई थी या कोई और भी था?
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार जांच की जद में रेस्ट हाउस के मुख्य द्वार और गैलरी के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज आ सकती है। इससे यह साफ होगा कि क्या युवती अकेले आई थी या रेलवे का कोई अर्दली या मातहत स्टाफ उसे कमरा दिलाने साथ पहुंचा था।
क्या मामला दबाने का है प्रयास?
हैरानी की बात यह है कि घटना के तीन दिन बाद भी रेलवे प्रशासन की ओर से न तो अपनी आईडी के दुरुपयोग की कोई आंतरिक विजिलेंस जांच बैठाई गई है और न ही साइबर सेल में कोई शिकायत दी गई है। डिजिटल सिस्टम में लागिन टाइम, आईपी एड्रेस और ओटीपी वेरिफिकेशन का पूरा डेटा सुरक्षित रहता है, फिर भी इस पर रहस्यमयी चुप्पी बरती जा रही है। ऐसे में चर्चा गर्म है कि क्या विभाग अपने किसी रसूखदार चेहरे को बचाने के लिए पूरा मामला दबाने में जुटा है।
चुभ रहे ये सवाल
- आनलाइन बुकिंग के बाद रेस्ट हाउस के रिसेप्शन रजिस्टर में युवती की आईडी और लोकल रेफरेंस के तौर पर किसका नाम दर्ज है?
- रेस्ट हाउस के कैमरों में युवती के साथ कौन-कौन अंदर जाते और बाहर निकलते कैद हुआ है?
- अगर सीनियर डीपीओ की आईडी का गलत इस्तेमाल हुआ, तो विभाग ने साइबर सेल में एफआईआर क्यों नहीं कराई?
- रेलवे की सुरक्षित संपत्ति को ब्लैकमेलिंग का अड्डा बनाए जाने के बाद भी अब तक कोई आंतरिक जांच कमेटी गठित क्यों नहीं हुई?
- क्या युवती को कमरा दिलाने में स्थानीय स्तर पर किसी बड़े सिंडिकेट का हाथ था, जिसे अब ''कवर-अप'' दिया जा रहा है?
