लखपति बने प्रयागराज के 100 से ज्यादा गांव, तालाबों ने बदली ग्रामीणों की जिंदगी; मिला सालों पुराना हक
प्रयागराज की 100 से अधिक ग्राम पंचायतों को तालाबों की नीलामी से 5 करोड़ रुपये मिले हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन गई हैं।

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HighLights
तालाबों की नीलामी से 100+ पंचायतों को 5 करोड़ मिले।
राजस्व विभाग से ग्राम निधि खातों में पहुंची नीलामी की रकम।
ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर बनीं, विकास कार्यों में नहीं होगी देरी।
सूर्यप्रकाश तिवारी, प्रयागराज। जिले की 1540 में से ज्यादातर ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिनकी कोई आमदनी नहीं थी। आन सोर्स रेवेन्यू (ओएसआर) के नाम पर इनके खाते खाली रहते थे या फिर नाम मात्र की पूंजी होती थी। ऐसी ही तंगहाली से जूझ रहीं एक सैकड़ा से अधिक ग्राम पंचायतों को तालाबों ने लखपति बना दिया है। इनकी नीलामी से मिले पांच करोड़ रुपये ग्राम निधि के बैंक खाते में पहुंच गए हैं। कुछ ग्राम पंचायतों के हिस्से तो दो से चार लाख रुपये तक आए हैं। वहीं कुछ को 70 से 80 हजार रुपये मिले।
वर्षों तक राजस्व विभाग के खजाने में डंप रही यह वह रकम है, जो वर्ष 2016 से लेकर 2026 के बीच तालाबों की नीलामी से मिली थी। गंगापार व यमुनापार के लगभग हर गांव में तालाब हैं। करीब पांच हजार तालाब तो मनरेगा से खोदवाए गए हैं। इनमें करीब 2800 तालाब ऐसे हैं, जिनकी मत्स्य पालन के लिए तहसील प्रशासन नीलामी कराता है।
तालाब ग्राम पंचायतों की संपत्ति होते हैं, इसलिए नीलामी की रकम का 75 फीसद पंचायतों को देने का आदेश था। जबकि पंचायतों को फूटी कौड़ी नहीं मिलती थी। पूरी धनराशि राजस्व विभाग के खाते में पहुंच जाती थी। अब शासन ने पंचायतों के हिस्से की रकम लौटाने के निर्देश दिए हैं।
डीपीआरओ रवि शंकर द्विवेदी का कहना है कि भगवतपुर की 25, जसरा की 45 और शंकरगढ़ 38 पंचायतों के खाते में ओएसआर की रकम जमा हो गई है। सबकी धनराशि अलग-अलग है। अब तक करीब पांच करोड़ रुपये ग्राम पंचायतों को मिले हैं।
900 गांव और होंगे लाभान्वित
सदर के करेहदा उपरहार, अहमदपुर पावन, खटांगी, भीखपुर मेड़वारा, बेगमपुर, जसरा के अमरेहा, बैजला, बारा खास, गींज, शंकरगढ़ के अकौरिया, अमिलिहा तरहार, बैरी, बसहरा उपरहार सहित अन्य गांवों को लाभ मिला है। ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर बन गईं हैं। छोटे-मोटे कामों के लिए इन्हें केंद्रीय और राज्य वित्त आयोग की निधि के बजट की राह नहीं देखनी पड़ेगी। लगभग 900 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिन्हें ओएसआर की रकम मिलनी बाकी है।
पांच गुना बजट दिलाने की बनी राह
शासन की एक योजना है कि 1500 की आबादी वाली आत्मनिर्भर ग्राम पंचायतों को उनके ओएसआर का पांच गुना बजट दिया जाए। यहां छोटी ग्राम पंचायतें तो कई है, लेकिन इनकी कमाई का जरिया नहीं था। तालाबों की नीलामी की रकम मिलने से यह अड़चन भी दूर हो जाएगी।
