प्रयागराज में घनी आबादी से लेकर गांव तक फैला है कोल्ड स्टोरेज का जाल, मंडराता रहता है लोगों की जान पर खतरा
प्रयागराज में घनी आबादी वाले इलाकों में संचालित कोल्ड स्टोरेज और कारखानों से लोगों की जान को खतरा है। सोरांव में हुए हादसे ने इस समस्या को उजागर किया है।

मलाक हर-हर स्थित चंदापुर गांव में आदर्श कोल्ड स्टोरेज में अमोनिया का टैंक फट जाने के क्षतिग्रस्त भवन।- जागरण
HighLights
सोरांव हादसे ने कोल्ड स्टोरेज सुरक्षा पर चिंता बढ़ाई।
प्रयागराज में घनी आबादी में चल रहे कई कारखाने।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी से बड़े हादसों का डर।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सोरांव में सोमवार को हुए दर्दनाक हादसे ने सरकारी अव्यवस्था और कोल्ड स्टोरेज के कुप्रबंधन ने कई लोगों की जान ले ली। इसके साथ ही शहर की घनी आबादी से लेकर गांव तक फैले कोल्ड स्टोरेज के जाल और उससे उत्पन्न होने वाले खतरे ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। शहर में कई ऐसे कारखाने भी हैं, जहां औद्योगिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने हुए हैं। इस अनदेखी से कभी हादसे होने की आशंका बनी है।
बताया गया है कि शहर के मुंडेरा, लूकरगंज, सिविल लाइंस, तेलियरगंज, कीडगंज, नैनी सहित कई मुहल्ले में बड़े-बड़े स्टोरेज हैं। यहां बड़े पैमाने पर अलग-अलग वस्तुओं का भंडारण किया जाता है। पिछले कई साल से यह स्टोरेज चल रहे हैं और उसके आसपास तमाम आवासीय भवन भी हैं, जिसमें लोग अपने अपने परिवार के साथ रहते हैं।
मुट्ठीगंज, कीडगंज, खुल्दाबाद और कोतवाली समेत कई इलाके में तमाम कारखाने भी हैं, जहां औद्योगिक गतिविधि होती है। ये कारखाने भी घनी आबादी के बीच में है, जहां किसी तरह की घटना, दुर्घटना बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है। इसी तरह यमुनापार और गंगापार क्षेत्र में कई कोल्ड स्टोरेज व कारखाने स्थापित किए गए हैं। इनमें कई छोटे कारखाने ऐसे भी हैं जो चोरी-छिपे चल रहे हैं।
कोल्ड स्टोरेज के लिए जिम्मेदार विभाग के मुताबिक जिले में करीब 50 कोल्ड स्टोरेज हैं। वहां की सभी व्यवस्था का आंकलन करने के साथ कमियों को सुधारने की जिम्मेदारी होती है। कुछ जानकारों का कहना है कि शहर से लेकर कस्बों तक संचालित कोल्ड स्टोरेज और कारखाने के मानकों और सभी नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जाता है। संबंधित विभाग के अधिकारी भी उसका पालन करवाने के लिए यदाकदा ही सक्रिय होते हैं। सुरक्षा उपकरणों की जांच और दूसरी व्यवस्था का परिपालन नहीं होने के कारण इस तरह के हादसे होते हैं।
