प्रयागराज में सूखी लोनी नदी में फिर बहने लगी जलधारा, युवा शोध छात्रा अनीता ने जगाई उम्मीद
प्रयागराज की शोध छात्रा अनीता सिंह ने चार वर्षों में शंकरगढ़ की सूखी लोनी नदी के छह किलोमीटर हिस्से को ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
अनीता सिंह ने लोनी नदी पुनर्जीवन का बीड़ा उठाया।
छह किलोमीटर नदी का हिस्सा पुनर्जीवित हुआ।
स्थानीय समुदाय और पंचायतों का मिला सहयोग।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सूखी नदियों में फिर से जलधारा बहाने का सपना लेकर प्रयागराज की युवा शोध छात्रा अनीता सिंह पिछले चार वर्षों से जुटी हैं। नैनी की रहने वाली अनीता ने शंकरगढ़ क्षेत्र की लोनी नदी को पुनर्जीवित करने की पहल की। गांव-गांव जाकर महिलाओं से संवाद, ग्राम पंचायतों के सहयोग और स्थानीय लोगों को जागरूक करने के प्रयासों से नदी के करीब छह किलोमीटर हिस्से को पुनर्जीवित करने में सफलता मिली है।
गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान की शोध छात्रा अनीता के मन में नदियों को बचाने की ललक उत्तराखंड की यात्रा के दौरान जगी। शोध के सिलसिले में चमोली पहुंचीं तो वहां की महिलाओं ने उनसे सवाल किया कि इतनी दूर आकर काम करने के बजाय अपने क्षेत्र में प्रयास क्यों नहीं करतीं? इस सवाल ने उन्हें अपने आसपास की नदियों और जलस्रोतों की बदहाली पर सोचने को प्रेरित किया। इसके बाद बुंदेलखंड की यात्रा ने जल संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
35 किलोमीटर लंबी नदी को बचाने की चुनौती शंकरगढ़ के गाढ़ा कटरा गांव से निकलकर टोंस नदी में मिलने वाली लोनी नदी 13 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरती है। समय के साथ नदी के सूखने से चिंतित अनीता ने स्थानीय स्तर पर लोगों को जोड़ना शुरू किया। उन्होंने महिलाओं और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों से बातचीत कर नदी संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बनाने की कोशिश की।
कई ग्राम पंचायतों का सहयोग मिलने से अभियान को गति मिली। चार वर्षों की मेहनत से गाढ़ा कटरा से बेनीपुर तक नदी के करीब छह किलोमीटर हिस्से को पुनर्जीवित किया गया। हालांकि, नदी के पूरे प्रवाह को बहाल करना अभी चुनौती है। अनीता के प्रयासों ने साबित किया है कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी और निरंतर पहल से सूखते जलस्रोतों को बचाने की दिशा में ठोस बदलाव संभव है।
