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अब AI बताएगा अपराधों की कहानी, तैयार होगा थ्रीडी मॉडल

Published: Fri, 16 Oct 2026 08:44 AM (IST)

एमएनएनआइटी के शोधार्थी अर्पित दुबे ने 'टेक एंड फारेंसिक' स्टार्टअप शुरू किया है। यह एआइ और थ्रीडी मॉडल का उपयोग ...और पढ़ें

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HighLights

  1. एमएनएनआइटी के अर्पित दुबे ने 'टेक एंड फारेंसिक' स्टार्टअप शुरू किया।

  2. एआइ और थ्रीडी मॉडल से अपराध स्थल का विश्लेषण संभव होगा।

  3. पुलिस को साक्ष्य समझने और घटनाक्रम जोड़ने में मदद मिलेगी।

मृत्युंजय मिश्र, प्रयागराज। अपराधों के घटनास्थल की तस्वीरों और वीडियो में छिपे सुरागों को समझना अब पहले से ज्यादा आसान हो सकता है। घटनास्थल पर मौजूद वस्तुओं की स्थिति, साक्ष्यों के बीच संबंध और घटना के संभावित क्रम को त्रिआयामी (थ्रीडी) माडल के जरिए समझने की तकनीक विकसित करने की दिशा में मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआइटी) के शोधार्थी अर्पित दुबे ने पहल की है।

उन्होंने फारेंसिक विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) को जोड़कर ‘टेक एंड फारेंसिक’ नाम से स्टार्टअप शुरू किया है। यह एक वर्चुअल रियलिटी एनीमेशन थ्रीडी माडल होगा, जो पुलिस और जांच एजेंसियों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा।

एमएनएनआइटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के डा. दिव्य कुमार के निर्देशन में फारेंसिक एआइ विषय पर पीएचडी कर रहे अर्पित दुबे ने अपने अनुसंधान के स्टार्टअप की शक्ल में परिवर्तित करने के लिए इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन हब एमएनएनआइटी फाउंडेशन से इनक्यूबेशन हासिल कर लिया है। वह कहते हैं कि आमतौर पर किसी अपराध के बाद पुलिस घटनास्थल की तस्वीरें लेती है, वीडियो बनाती है और भौतिक साक्ष्य जुटाती है।

इन सूचनाओं का विश्लेषण कर जांच अधिकारी घटना की कड़ियां जोड़ने का प्रयास करते हैं। हालांकि साक्ष्यों की अधिकता और आपसी स्थिति को समझने में चुनौती आती है। यह स्टार्टअप इसी चुनौती का तकनीकी समाधान तैयार कर रहा है। घटनास्थल की उपलब्ध तस्वीरों, वीडियो और एकत्र किए गए साक्ष्यों की मदद से एआइ आधारित थ्रीडी सीन रिक्रिएशन संभव होगा। इसमें फोटोग्रामेट्री तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

वर्चुअल रियलिटी से समझ सकेंगे घटनाक्रम
थ्रीडी माडल और वर्चुअल रियलिटी के जरिए घटनास्थल पर घटी संभावित परिस्थितियों को डिजिटल रूप में देखकर उसकी संरचना तथा वस्तुओं की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने की संभावना है। इससे जांच अधिकारी संभावित घटनाक्रम का विश्लेषण कर सकेंगे और महत्वपूर्ण सुरागों पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। भविष्य में ऐसी तकनीक न्यायालय में भी घटनास्थल और जांच से जुड़े तथ्यों को दृश्य रूप में प्रस्तुत करने में उपयोगी हो सकती है।

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वह कहते हैं कि थ्रीडी माडल अपने आप अपराधी की पहचान या गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं करेगा। निष्कर्षों की पुष्टि अन्य भौतिक एवं डिजिटल साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और पारंपरिक पुलिस जांच से करनी होगी।

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