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Magh Mela 2027 में शुरू होगी नई परंपरा, अखाड़ों की तर्ज पर पहली बार संगम में 'देव अमृत स्नान' करेंगे दंडी संन्यासी

Published: Tue, 06 Oct 2026 09:30 AM (GMT+05:30)

माघ मेला 2027 में दंडी संन्यासी अखाड़ों की तर्ज पर 'देव अमृत स्नान' करेंगे, जिसमें ध्वज-पताका और बैंडबाजे के साथ आदिशंकराचार्य की शोभायात्रा निकाली जाएगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. माघ मेला 2027 में दंडी संन्यासी करेंगे 'देव अमृत स्नान'।

  2. अखाड़ों की तरह ध्वज-पताका संग निकलेगी शोभायात्रा।

  3. अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद ने की सुविधा की मांग।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। माघ मेला-2027 में दंडी संन्यासी 'देव अमृत स्नान' करेंगे। अखाड़ों की भांति उनका समूह मेला क्षेत्र में निकलेगा। ध्वज-पताका, बैंडबाजा के साथ आदिशंकराचार्य की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।

मेला क्षेत्र का भ्रमण करते हुए समस्त दंडी संन्यासी संगम तट तक जाएंगे। संगम पूजन के बाद स्नान करेंगे। माघ मेला में यह नई परंपरा शुरू होगी। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद ने इसको लेकर प्रशासन से सुविधा और सुरक्षा देने की मांग की है।
कुंभ, महाकुंभ में अखाड़ों के नागा संन्यासी, महामंडलेश्वर ध्वज-पताका, बैंडबाजा के साथ अमृत स्नान करते हैं।

दंडी संन्यासियों ने उसी के अनुरूप स्नान करने का निर्णय लिया है। माघ मेला क्षेत्र के गंगोली शिवालय मार्ग पर दंडी संन्यासी नगर बसाया जाता है। इसमें देशभर के लगभग पांच हजार दंडी संन्यासी कल्पवास करते हैं। भजन, पूजन और प्रवचन में लीन रहते हैं। वह गंगा में स्नान करते हैं।

संगम तक समूह में कभी स्नान करने नहीं गए

शिविर स्थल से संगम की दूरी होने के कारण पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा स्नान पर्व में भी गंगा में स्नान करते थे। अबकी वसंत पंचमी के बाद अखाड़ों की भांति सामूहिक रूप से संगम स्नान करने का निर्णय लिया है। संगम तक समूह में कभी स्नान करने नहीं गए।

वसंत पंचमी के बाद ध्वज-पताका, बैंडबाजा के साथ आदिशंकराचार्य की शोभायात्रा निकाली जाएगी। जो वरिष्ठ होंगे उन्हें रथ पर आसीन किया जाएगा। इस स्नान को 'देव अमृत स्नान'का नाम दिया गया है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम का कहना है कि आदिशंकराचार्य की शोभायात्रा निकालकर संगम स्नान करने का निर्णय लिया गया है।

दंडी संन्यासी भगवान नारायण का स्वरूप माने जाते हैं। इसके मद्देनजर इसे 'देव अमृत स्नान' का नाम दिया गया है। श्रद्धालुओं को समस्या न आए उसके लिए वसंत पंचमी के बाद स्नान करने का निर्णय लिया गया है। मेला प्रशासन से स्नान के लिए सुविधा और सुरक्षा देने की मांग की गई है।

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