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सिग्नल कक्ष में आया धुआं तो बजने लगेगा सायरन, आग से बचाव को रेलवे की अत्याधुनिक प्रणाली 

By Amarish Kumar Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 19 Sep 2026 08:05 PM (IST)

प्रयागराज रेल मंडल सिग्नलिंग कक्षों को आग से बचाने के लिए अत्याधुनिक ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन और अलार्म सिस्टम लगा रहा ...और पढ़ें

उत्तर मध्य रेलवे का इलाहाबाद मंडल सिग्नल रूम को आग की घटनाओं को रोकने के लिए अत्याधुनिक प्रणाली का प्रयोग करेगा।

उत्तर मध्य रेलवे का इलाहाबाद मंडल सिग्नल रूम को आग की घटनाओं को रोकने के लिए अत्याधुनिक प्रणाली का प्रयोग करेगा।

HighLights

  1. प्रयागराज रेल मंडल में सिग्नलिंग को आग से बचाने के लिए तकनीक का उपयोग

  2. छिवकी-डीडीयू और चुनार-चोपन खंड के लिए 1.90 करोड रुपये का टेंडर जारी

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। अक्सर हम सुनते हैं कि किसी स्टेशन के सिग्नल रूम में तकनीकी खराबी या शार्ट सर्किट से आग लग गई और पूरा रेल रूट घंटों के लिए ठप पड़ गया। अब प्रयागराज मंडल में ऐसा नहीं होगा। रेलवे अपने सिग्नलिंग कक्षों को ऐसी आधुनिक तकनीक से लैस करने जा रहा है, जो आग भड़कने तो दूर, कमरे में हल्का सा धुआं उठते ही सायरन बजाकर अलर्ट कर देगी। यह होगा आटोमैटिक फायर डिटेक्शन और अलार्म सिस्टम से।

एनसीआर के प्रयागराज मंडल में पहल हुई

ट्रेनों की रफ्तार और यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए उत्तर मध्य रेलवे यानी एनसीआर के (प्रयागराज मंडल) ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय-प्रयागराज छिवकी और चुनार-चोपन रेलखंडों तकनीकी पहल की है। इन दोनों व्यस्त रूटों के सभी इनडोर सिग्नलिंग रूम में आरडीएसओ द्वारा प्रमाणित आटोमैटिक फायर डिटेक्शन और अलार्म सिस्टम लगाए जाएंगे।

कैसे काम करता है सिग्नल रूम?

दरअसल, सिग्नल रूम रेलवे का ‘दिमाग’ होते हैं। यहां 24 घंटे संवेदनशील रिले और इलेक्ट्रानिक इंटरलाकिंग सिस्टम काम करते हैं। अगर इनमें कभी शार्ट सर्किट या तापमान बढ़ने की स्थिति बनती है, तो यह आधुनिक सेंसर युक्त सिस्टम शुरुआती पलों में ही उसे भांप लेगा। इससे पहले कि चिंगारी आग का रूप ले, अलार्म बज उठेगा और तुरंत कार्रवाई हो सकेगी।

रेल यात्रियों को लेटलतीफी नहीं झेलनी होगी 

इसका सबसे बड़ा फायदा रेलवे और यात्रियों, दोनों को मिलेगा। रेलवे को करोड़ों रुपये के महंगे उपकरणों के खाक होने और भारी नुकसान से मुक्ति मिलेगी। वहीं यात्रियों को सिग्नल फेल होने की वजह से घंटों बीच रास्ते में अटके रहने, ट्रेनों की लेटलतीफी और रद्दीकरण के झंझट से राहत मिलेगी।

ई-टेंडर जारी, 12 अक्टूबर तक आवेदन होंगे 

मंडल पीआरओ अमित कुमार सिंह ने बताया कि लगभग 1.90 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले इस काम के लिए ई-टेंडर जारी कर 12 अक्टूबर तक आवेदन मांगे हैं। अनुबंध होने के बाद इसे 12 महीने में पूरा कर लिया जाएगा।

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