अब 10000 KM नॉन-स्टॉप दौड़ेंगी मालगाड़ियां, रेलवे ने तैयार किया मास्टर प्लान
रेलवे बोर्ड ने मालगाड़ियों के ब्रेक पावर सर्टिफिकेट (बीपीसी) ट्रायल को 31 मार्च 2027 तक मंजूरी दे दी है, जिससे ...और पढ़ें

डीएफसी ट्रैक से गुजरती मालगाड़ी
HighLights
मालगाड़ियां अब 10 हजार किमी तक बिना रुके चलेंगी।
बीपीसी ट्रायल को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया गया।
सामान की आपूर्ति तेज होगी, समय की बचत होगी।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। देशभर में पटरियों पर दौड़ने वाली मालगाड़ियों के पहियों की सुस्ती अब पूरी तरह टूटने वाली है और वे बिना किसी तकनीकी रुकावट के एक बार में पूरे 10 हजार किलोमीटर तक लगातार दौड़ेंगी। सामान की तेज आपूर्ति के लिए रेलवे बोर्ड ने 30 सितंबर को मालगाड़ियों के ब्रेक पावर सर्टिफिकेट (बीपीसी) के देशव्यापी ट्रायल को 31 मार्च 2027 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इससे समय बचेगा, मालगाड़ियों को बार-बार यार्डों में नहीं ले जाना पड़ेगा।
ब्रेक पावर सर्टिफिकेट (बीपीसी) मालगाड़ी का प्राथमिक सुरक्षा और फिटनेस पासपोर्ट होता है। रेलवे के कैरिज एंड वैगन (सीएंडडब्ल्यू) डिपो और बड़े यार्डों में मैकेनिकल इंजीनियर और तकनीकी परीक्षक ट्रेन रवाना होने से पहले इसकी गहन जांच करते हैं। यार्डों में कम्प्रेसर से ब्रेक पाइप में हवा का दबाव भरकर लीकेज, पिस्टन स्ट्रोक और ब्रेक शू की मोटाई जांची जाती है। शत-प्रतिशत ब्रेक क्षमता मिलने पर ही बीपीसी जारी होता है।
अब इस पूरी प्रक्रिया में अत्याधुनिक सेंसर तकनीक की भी मदद ली जा रही है। ट्रैक पर लगे ''व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर'' सेंसर चलते पहियों की दरार व खराबी भांप लेते हैं, जबकि ''हाट बाक्स डिटेक्टर'' थर्मल सेंसर से पहियों और एक्सल के अत्यधिक गर्म होने का तुरंत पता चल जाता है। इसके अलावा रेलवे के एफओआईएस साफ्टवेयर से ट्रेन के तय किलोमीटर और दिनों की डिजिटल ट्रैकिंग होती रहती है।
मंडियों तक राशन समय पर पहुंचेगा
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (मैकेनिकल इंजीनियरिंग-फ्रेट) लोकेश सिंह के अनुसार पुरानी व्यवस्था के तहत मालगाड़ियों को महज छह हजार से साढ़े सात हजार किलोमीटर या करीब 30 दिनों में दोबारा जांच के लिए डिपो भेजना पड़ता था, जिससे उनका काफी समय यार्डों में खड़ा रहने में बर्बाद होता था।
अब नए नियमों के तहत कोयला और भारी माल ढोने वाले बॉक्सन और गैस टैंकर पूरे 10 हजार किमी (35 पांच दिन) तक बिना रुके चलेंगे।
वहीं अनाज ढोने वाले बीसीएन वैगन व कंटेनर नौ हजार किमी (30 पांच दिन) और स्टील रेक 12 तीन दिन दौड़ सकेंगे। इस बड़े बदलाव से मालगाड़ियों का यार्ड में डिटेंशन खत्म होगा, उनके फेरे बढ़ेंगे और बिजलीघरों तक कोयला व मंडियों तक राशन बिना किसी अड़चन के समय पर पहुंचेगा।
