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विदेशी विश्वविद्यालयों के शिक्षक भी बन सकेंगे IIIT Allahabad के शोध छात्रों के सह गाइड, मिलेगा वैश्विक मार्गदर्शन

By Mritunjay Mishra Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 22 Sep 2026 05:01 PM (IST)

IIIT इलाहाबाद के पीएचडी छात्रों को अब विदेशी विश्वविद्यालयों के शिक्षक सह-गाइड के रूप में मिल सकेंगे, जिससे शोध को ...और पढ़ें

IIIT इलाहाबाद।

IIIT इलाहाबाद।

HighLights

  1. IIIT में शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया

  2. सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नीति को सीनेट चेयरमैन के अनुमोदन को रखा जाएगा

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) में शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके तहत पीएचडी विद्यार्थियों के को-सुपरविजन यानी सह-पर्यवेक्षण के लिए नई संस्थागत नीति को मंजूरी दी गई। इसके तहत संस्थान के पीएचडी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर शोध करने का अवसर मिल सकेगा।

सीनेट ने इस नीति को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार करते हुए इसके मसौदे को आवश्यक सुझावों और संशोधनों के लिए संबंधित स्तर पर भेजने का निर्णय लिया है। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नीति को सीनेट चेयरमैन के अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।

नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पीएचडी विद्यार्थियों के शोध का दायरा संस्थान के परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों को को-सुपरवाइजर के रूप में जोड़े जाने की व्यवस्था से विद्यार्थियों को अलग-अलग संस्थानों की विशेषज्ञता, शोध संसाधनों और अकादमिक अनुभव का लाभ मिल सकेगा।

इसका फायदा यह होगा कि भविष्य में संस्थान द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ पीएचडी सह-पर्यवेक्षण की व्यवस्था विकसित कर सकेगा। प्रस्तावित नीति को संबंधित स्तर पर सुझावों के लिए प्रसारित किया जाएगा। इसके बाद प्राप्त इनपुट्स के आधार पर इसमें आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। संशोधित नीति की समीक्षा डीन रिसर्च इनोवेशन के स्तर पर भी की जाएगी और फिर इसे अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।

2026-27 से लागू करने की तैयारी

सीनेट के निर्णय के अनुसार संशोधित नीति को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया जाना है। इस व्यवस्था से शोधार्थियों को अपने विषय के विशेषज्ञों के साथ व्यापक अकादमिक संवाद का अवसर मिलने की संभावना है। विशेष रूप से ऐसे शोध क्षेत्रों में, जहां किसी दूसरे विश्वविद्यालय या शोध संस्थान के पास विशिष्ट विशेषज्ञता या शोध सुविधा उपलब्ध हो, वहां को-सुपरविजन उपयोगी हो सकता है। नीति के अंतिम प्रावधान और उसके तहत बनने वाले संस्थागत समझौते यह तय करेंगे कि शोधार्थियों को यह सुविधा किस रूप में और किन शर्तों पर उपलब्ध होगी।

तैयार हो रही है नई शोध नैतिकता नीति

आईआईआईटी की शोध नैतिकता नीति में यूजीसी और आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शोध नैतिकता, शोध दुराचार, जवाबदेही, शोध नैतिकता समिति की भूमिका, शोधार्थियों की समीक्षा प्रक्रिया और जनरेटिव एआइ के जिम्मेदार उपयोग जैसे विषय शामिल हैं। फर्जीवाड़े और साहित्यिक चोरी पर रोक के साथ नए शोधार्थियों के लिए पहले सेमेस्टर में क्रेडिट आधारित रिस्पांन्सिबल कंडक्ट आफ रिसर्च (आरसीआर) प्रशिक्षण का भी प्रस्ताव है। सीनेट के प्रस्ताव के अनुसार मसौदा सभी शिक्षकों को सुझाव के लिए फिर भेजा जाएगा। इसके बाद संशोधित नीति तैयार की जाएगी।

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