इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन: निवर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल बढ़ाने से एल्डर्स कमेटी का इन्कार
इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की एल्डर्स कमेटी ने निवर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल बढ़ाने से इनकार कर दिया है। कहा ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन: एल्डर्स कमेटी ने कार्यकाल विस्तार का प्रस्ताव ठुकराया।
HighLights
एल्डर्स कमेटी ने जुलाई में आमसभा के प्रस्ताव को नियम के विपरीत बताया
एचसीबीए के अध्यक्ष व महासचिव ने एल्डर्स कमेटी अध्यक्ष को पत्र भेजा था
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन इलाहाबाद (एचसीबीए) की एल्डर्स कमेटी ने निवर्तमान कार्यकारिणी के कार्यकाल विस्तार की मांग को नियमों के आधार पर अस्वीकार कर दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता वीके सिंह की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कमेटी ने स्पष्ट किया है कि बार एसोसिएशन के बाइलाज के अनुसार 13 महीने की अवधि समाप्त होने के बाद निर्वाचित निकाय के पास किसी भी प्रकार से कार्य करने का अधिकार नहीं होता।
हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडे बबुआ और महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा ने 15 सितंबर 2026 को एल्डर्स कमेटी के अध्यक्ष को पत्र भेजा था। इसमें 10 जुलाई 2026 की आम सभा के प्रस्ताव का उल्लेख किया गया था, जिसमें कहा गया था कि नई कार्यकारिणी के कार्यभार ग्रहण करने तक वर्तमान कार्यकारिणी पूर्ववत कार्य करती रहेगी। पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि चुनाव 17 सितंबर 2026 को होने हैं और दैनिक कार्यों तथा अधिवक्ताओं को अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के लिए एल्डर्स कमेटी से कार्य जारी रखने की अनुमति आवश्यक है।
एल्डर्स कमेटी ने अपने आदेश में बार के बाइलाज के नियम 17 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस नियम के तहत पदाधिकारी एक वर्ष के लिए पदभार ग्रहण करते हैं और चुनाव कराने के लिए केवल एक अतिरिक्त माह (कुल 13 महीने) की छूट होती है। 13 माह की अवधि समाप्त होने के बाद प्रशासनिक अधिकार स्वतः एल्डर्स कमेटी में निहित हो जाते हैं।
कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया कि 11 अगस्त 2026 के बाद निर्वाचित निकाय केवल चुनाव संपन्न कराने के सीमित उद्देश्य से एक माह और कार्य कर सकती थी। 13 माह की मियाद बीत जाने के बाद न तो आम सभा और न ही एल्डर्स कमेटी के पास वर्तमान पदाधिकारियों का कार्यकाल बढ़ाने की कोई वैधानिक शक्ति है। इस प्रकार कमेटी ने आमसभा के प्रस्ताव को नियम 17 के विपरीत मानते हुए कार्यकाल विस्तार देने से स्पष्ट रूप से इन्कार कर दिया।
