प्रयागराज: झूंसी में खाली हाथ रहा वन विभाग, अब हंडिया में तेंदुए की चहलकदमी का दावा; डरे ग्रामीणों ने मांगी सुरक्षा
प्रयागराज के हंडिया स्थित टेला गांव में सीसीटीवी फुटेज में तेंदुआ दिखने के दावे से ग्रामीणों में दहशत है, जिसके ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
टेला गांव में सीसीटीवी में तेंदुआ दिखने का दावा।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से तेंदुए को पकड़ने की गुहार लगाई।
वन विभाग हंडिया में पगचिन्हों की तलाश में जुटा।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। झूंसी में तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम पिंजरा लगाकर इंतजार करती रही और इसी बीच उसके करीब 30 किलोमीटर दूर हंडिया पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। अब हंडिया तहसील के ग्राम सभा टेला गांव की एक बस्ती में तेंदुआ दिखाई देने के दावे ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। एक ग्रामीण के घर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में तेंदुआ नजर आने की बात कही जा रही है।
इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर गांव में भय का माहौल है। टेला गांव निवासी बाबा सिंह ने जिलाधिकारी प्रयागराज को प्रार्थना पत्र देकर वन विभाग की विशेषज्ञ टीम तत्काल भेजने की मांग की है।
बाबा ने बताया कि उनके घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में तेंदुआ दिखाई दिया है। उनका कहना है कि रिहायशी बस्ती में जंगली जानवर की मौजूदगी की आशंका को गंभीरता से लेते हुए समय रहते जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की टीम गांव पहुंची, लेकिन आवश्यक कार्रवाई किए बिना लौट गई। इससे लोगों में नाराजगी और भय दोनों हैं।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है। इससे पहले मंगलवार रात एचआरआइ परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में तेंदुए की चहलकदमी कैद होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद वनकर्मियों ने उसकी तलाश शुरू की और उसे पकड़ने के लिए पिंजरा भी लगाया, लेकिन तेंदुआ पकड़ में नहीं आया। बाद में झूंसी क्षेत्र में भी उसे पकड़ने के प्रयास किए गए। अब हंडिया में उसके दिखाई देने के दावे के बाद उसकी संभावित आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भूखा होने पर बढ़ सकती है तेंदुए की आवाजाही
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) बरेली के वन्यजीव विशेषज्ञ के मुताबिक तेंदुआ सामान्य परिस्थितियों में एक दिन में करीब 10 से 12 किलोमीटर तक चल सकता है। भोजन की तलाश में उसकी आवाजाही इससे अधिक भी हो सकती है। ऐसे में चार दिन में 30 से 40 किलोमीटर की दूरी तय करना असामान्य नहीं है। विशेषज्ञ ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे में सुअर के बच्चे को चारे के रूप में रखा जाता है।
उसके शोर से तेंदुए का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, पिंजरे के आसपास लोगों की अधिक आवाजाही होने पर इंसानों की गंध तेंदुए तक पहुंच सकती है, जिससे वह सतर्क होकर उस स्थान से दूर जा सकता है। इसलिए रेस्क्यू अभियान में सावधानी और अनावश्यक मानवीय गतिविधियों पर नियंत्रण जरूरी है।
पगचिन्हों से लोकेशन पता लगाने में जुटा वन विभाग
हंडिया के रेंजर मोहम्मद इमरान खान ने बताया कि तेंदुआ दिखाई देने की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम लगातार उसकी संभावित गतिविधियों पर नजर रख रही है। उसके पगचिन्ह तलाशे जा रहे हैं, ताकि उसकी लोकेशन का पता लगाया जा सके। वन विभाग की ओर से तलाश जारी होने की बात कही गई है।
