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'H1 N1' वायरस क्या है? इसके फैलने का प्रयागराज में खतरा, बचाव को SRN अस्पताल में बनाए गए वार्ड और लैब

By Amerdeep Bhatt Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 25 Aug 2026 04:37 PM (IST)

प्रयागराज में H1N1 वायरस का खतरा बढ़ रहा है, जिसके बचाव के लिए SRN अस्पताल में विशेष वार्ड और लैब ...और पढ़ें

'एच-1 एन-1' वायरस फैलने की आशंका देखते हुए प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में वार्ड बनाए गए हैं।

'एच-1 एन-1' वायरस फैलने की आशंका देखते हुए प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में वार्ड बनाए गए हैं।

HighLights

  1. सर्दी, खांसी, बुखार जैसी मौसमी संक्रामक बीमारियों के बीच इन्फ्लुएंजा 'एच-1 एन-1' का संक्रमण

  2. 3 दिनों तक तेज बुखार संग सांस में परेशानी हो तो RTPCR जांच कराने की सलाह दे रहे डॉक्टर

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सर्दी, खांसी, बुखार जैसी मौसमी संक्रामक बीमारियों के बीच इन्फ्लुएंजा 'एच-1 एन-1' का खतरा है। अस्पतालों में मरीजों की बढ़ी भीड़ के बीच डॉक्टर इन्फ्लुएंजा की आशंका जताते रहे। जिन्हें फेफड़े में संक्रमण या सांस की बीमारी पहले से नहीं है उनका एच 1 एन 1, प्रभावित राज्यों से संबंध जानने की कोशिश होती रही है।

पैथालॉजी विभाग में नमूने जांचने को टीम 

स्वास्थ्य विभाग ने इसके बचाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है। स्वरूपरानी नेहरू (एसआएन) चिकित्सालय में वार्ड आरक्षित किया गया है और पैथालॉजी विभाग में नमूने जांचने को टीम बनाई गई है। सचेत किया गया है कि तीन दिनों तक उच्च ताप के बुखार के साथ सांस लेने में रुकावट आ रही है तो तत्काल आरटीपीसीआर जांच कराएं।

दिल्ली, कर्नाटक, केरल में कई लोग संक्रमिक

वर्तमान मौसम में एच1एन1 वायरस का संक्रमण फैल रहा है। दिल्ली में 1777, कर्नाटक में चार हजार से अधिक लोगों में संक्रमण हो चुका है। केरल में अब तक इन्फ्लुएंजा के 7421 के मामले रिकार्ड हो चुके हैं। केरल में संक्रमितों की मौत भी होने से बीमारी खतरनाक होती दिख रही है। डाक्टरों का कहना है कि घबराने की बजाय सतर्क रहें। लक्षण को पहचानने और समय रहते चिकित्सकीय सलाह पर आरटीपीसीआर जांच कराने की आवश्यकता है।

सही समय पर जांच से होगी संक्रमण की पुष्टि

माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर और पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका ने बताया कि नाक और गले से नमूना लेकर आरटीपीसीआर जांच के माध्यम से संक्रमण की पुष्टि की जा सकती है। सही समय और सही तरीके से नमूने लिए जाएं, निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उसे पैथालॉजी तक पहुंचा दिया जाए। नमूने की जांच पूरी गंभीरता से हो तो वही डायग्नोस्टिक रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो जाती है और इससे संक्रमण पर नियंत्रण किया जा सकता है। बताया कि पैथालॉजी में जांच की तैयारियां रखी गई हैं।

दोनों फेफड़े में हो सकता है निमोनिया

एसआरएन अस्पताल के वरिष्ठ फजीशियन डॉ. अजीत चौरसिया ने बताया कि तीन दिनों तक उच्च ताप के साथ बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिर दर्द, शरीर में दर्द, अत्यधिक थकान और सांस लेने में परेशानी इसके मुख्य लक्षण हैं। अधिकांश मरीज सामान्य उपचार और देखभाल से ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर होकर फेफड़े में निमोनिया की स्थिति हो सकती है। आमतौर पर सामान्य बीमारियों में एक फेफड़े में बैक्टीरियल संक्रमण होता है। इन्फ्लुएंजा का संक्रमण धनात्मक हो जाए तो दोनों फेफड़े में निमोनिया हो सकता है। हालांकि कोई केस अभी सामने नहीं आए हैं लेकिन सतर्क सभी को रहना चाहिए।

अस्पताल में वार्ड आरक्षित कर दिया गया है, एच1एन1 इन्फ्लुएंजा के कोई केस अभी रिकार्ड नहीं हुए हैं लेकिन सतर्कता सभी को बरतना चाहिए। हो सके तो इन दिनों मास्क का इस्तेमाल करें ताकि भीड़ में किसी को संक्रमण हो भी तो उससे सुरक्षित रहा जा सकता है।
- प्रो. डॉ. एके वर्मा, प्राचार्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।

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