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दीपावली पर घर वापसी बनी चुनौती, ट्रेनों में 'नो रूम', 18 हजार की उड़ान और स्लीपर बसों का किराया छह हजार

Published: Thu, 17 Sep 2026 10:12 AM (IST)

दीपावली पर घर लौटने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ट्रेनें पूरी तरह बुक ...और पढ़ें

दीपावली पर यात्रियों के सामने घर आने की चुनौती। जागरण

दीपावली पर यात्रियों के सामने घर आने की चुनौती। जागरण

HighLights

  1. ट्रेनें पूरी तरह बुक, दिल्ली-हावड़ा रूट पर 'रिग्रेट' स्थिति।

  2. हवाई किराए 11,500 से 18,000 रुपये तक पहुंचे।

  3. अवैध निजी बसें मनमाना किराया वसूल रही, सुरक्षा जोखिम।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। दीपावली पर घर लौटने वाले प्रवासियों की मजबूरी पर निजी बस माफिया और एयरलाइंस खुलकर डाका डाल रहे हैं। दिल्ली-हावड़ा रेल रूट की 28 प्रमुख ट्रेनों में सात नवंबर को सभी श्रेणियों में 'रिग्रेट' (बुकिंग बंद) हो चुका है। प्रयागराज एक्सप्रेस, वंदे भारत, तेजस, हावड़ा राजधानी, शिवगंगा, पूर्वा, महाबोधि, सीमांचल, स्वतंत्रता सेनानी, हमसफर और अमृत भारत जैसी ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं है।

रेलवे से निराश यात्रियों को जब आसमान का रुख करना पड़ा, तो एयरलाइंस ने गला घोंट दिया। छह नवंबर को दिल्ली-प्रयागराज की उड़ान 11,500 के पार है। मुंबई से इंडिगो 18,000 और आकासा 16,000 प्रति यात्री वसूल रही हैं। हैदराबाद 17,000, तो बेंगलुरु और भुवनेश्वर का टिकट 14,000 पहुंच चुका है।ट्रेन और विमान से पिटे यात्रियों को अब निजी बस आपरेटर किराये के नाम पर लूट रहे हैं।

सामान्य दिनों में 1,600 से 2,000 में बिकने वाली स्लीपर सीट धनतेरस (छह नवंबर) को 4500 और छोटी दिवाली (सात नवंबर) को 6,000 तक पहुंच गई है। साधारण सीटिंग बसों तक में 3500 से 4,000 वसूले जा रहे हैं। श्यामली, ड्रीम क्रूजर और बीएसएस कूल जैसे आपरेटरों ने आनलाइन पोर्टल पर एक-एक स्लीपर सीट का किराया 8,000 तक ठोक दिया है।

गुरुग्राम में नौकरी करने वाले जितेंद्र प्रकाश ने 5,000 और सलोरी के पारितोष ने 5,700 देकर मजबूरी में सीट बुक कराई। दिल्ली में रह रहे डा. डीएन मिश्र ने बताया कि ट्रेन में दो माह पहले से टिकट लेने का प्रयास जारी है लेकिन कन्फर्म सीट नहीं मिल रही। पटना, बक्सर, पं. दीन दयाल उपाध्याय, वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली और राबर्ट्सगंज से प्रयागराज होकर दिल्ली जाने वाली 100 से अधिक बसें अवैध रूप से दौड़ रही हैं।

एक दर्जन बसें सीधे शहर से चल रही हैं। इनके पास न वैध परमिट है, न फिटनेस। पुलिस और आरटीओ की नाक के नीचे ‘कमाओ और कमाने दो’ के सिंडिकेट से यह धंधा चल रहा है। हाल के दिनों में एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बसों में आग लगने और टक्कर से दर्जनों सवारियों के जिंदा जलने के कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद इन डग्गामार बसों में अवैध केबिन बनाकर ठूंस-ठूंस कर सवारियां भरी जा रही हैं और इमरजेंसी खिड़कियों के आगे सीटें जड़ दी गई हैं। सीपीआरओ डा. शिवम शर्मा ने बताया कि सभी रूटों पर लगातार विशेष ट्रेनों का प्रबंध किया जा रहा है, यात्री उसमें यात्रा कर सकते हैं।

ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट का फर्जीवाड़ा
ये बसें ''ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट''लेकर चलती हैं। नियम यह है कि यह परमिट केवल पर्यटकों के पूरे ग्रुप को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए होता है। इसमें बीच रास्ते से अलग-अलग सवारियां बैठाना (स्टेज कैरिज) कानूनन गैरकानूनी है। ऑपरेटर कागजों पर एक फर्जी टूरिस्ट लिस्ट बनाकर आरटीओ की आंखों में धूल झोंकते हैं और हाईवे पर हर चौराहे से मुसाफिर भरकर सीधे बस सर्विस चलाते हैं। बस की निचली डिक्की में अवैध कमर्शियल माल, इलेक्ट्रानिक सामान, पटाखों के डिब्बे और केमिकल तक भर देते हैं। जबकि टिकट बुकिंग एप पर दिखने वाली ‘सिर्फ एक सीट बची है’ की चेतावनी असल में एक आर्टिफिशियल किल्लत होती है।

ऑपरेटर जानबूझकर अपनी 70% सीटें ब्लाक रखते हैं। अगर ऐसी अनधिकृत बस का कोई हादसा हो जाए, तो 90% मामलों में क्लेम या दुर्घटना बीमा का एक रुपया नहीं मिलता। वजह यह कि बस परमिट की शर्तों के उल्लंघन में चल रही होती है, जिससे दुर्घटना के वक्त उसका पूरा इंश्योरेंस अपने आप शून्य मान लिया जाता है। नियम है कि कोई भी स्लीपर बस केंद्रीय 'एआइएस-119 बस बाडी कोड' के मानकों के बिना सड़क पर नहीं उतर सकती।

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इसके तहत इमरजेंसी एग्जिट का चौड़ा होना, आग बुझाने वाले सेंसर और स्लीपर बर्थ के बीच तय दूरी अनिवार्य है। प्रयागराज से गुजरने वाली ज्यादातर बसें नगालैंड या अरुणाचल प्रदेश से फर्जी कागजों पर पास होकर आती हैं और स्थानीय वर्कशाप में देसी जुगाड़ से बर्थ बनवाकर चलती हैं।

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