नाबालिग रेप पीड़िता के गर्भपात पर हाई कोर्ट सख्त, CMO प्रयागराज को 48 घंटे का अल्टीमेटम
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात मामले में प्रयागराज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को 48 घंटे ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात मामले में सख्त रुख अपनाया।
सीएमओ प्रयागराज को 48 घंटे में मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश।
अगली सुनवाई 21 सितंबर, सीजेएम को उचित आदेश पारित करने का निर्देश।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रयागराज को निर्देश दिया है कि वह 48 घंटे के भीतर मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करें। पीड़िता ही इस मामले में याची है और गर्भधारण की अवधि 24 सप्ताह की वैधानिक सीमा पार कर चुकी है, इससे मामला संवेदनशील हो गया है।
इस प्रकरण में अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 के तहत अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) ने मेडिकल बोर्ड के गठन का आदेश दिया था और 14 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अब तक कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
खंडपीठ ने आदेश दिया कि सीएमओ पाक्सो कोर्ट के 11 सितंबर के आदेश के अनुपालन में रिपोर्ट तैयार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके बाद सीजेएम मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के दो महत्वपूर्ण फैसलों के आलोक में उचित आदेश पारित करेंगे।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सीजेएम के आदेश की रिपोर्ट अगली तिथि से पहले हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए। याची को 18 सितंबर को सीजेएम के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। राज्य विधि अधिकारी से कहा गया कि आदेश से सीएमओ और सीजेएम को सूचित किया जाए। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (कम्प्लायंस) को भी इसी आदेश को तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करने के लिए कहा गया है।
