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चंबल और केन नदी में बहकर प्रयागराज पहुंचे कई मगरमच्छ और घड़ियाल, 20 से ज्यादा जगहों पर दिखे

Published: Wed, 16 Sep 2026 06:01 PM (IST)

बाढ़ के कारण इटावा और पन्ना से बड़ी संख्या में घड़ियाल व मगरमच्छ प्रयागराज आ गए हैं। इनके लगातार दिखने से तटीय इलाकों में दहशत है।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

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HighLights

  1. बाढ़ से इटावा-पन्ना के घड़ियाल-मगरमच्छ प्रयागराज पहुंचे।

  2. तटीय इलाकों में लगातार दिखने से लोगों में दहशत।

  3. वन विभाग अब तक एक भी मगरमच्छ संरक्षित नहीं कर पाया।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। बाढ़ के दौरान इटावा के राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य और मध्य प्रदेश के पन्ना स्थित केन घड़ियाल अभयारण्य से बड़ी संख्या में घड़ियाल और मगरमच्छ बहकर संगमनगरी आ गए। तटीय इलाकों में आए दिन इनका इंसानों से सामना हो रहा है। कई जगह तो चार से पांच के झुंड में यह नजर आए। नदियों में इनकी मौजूदगी ने तटीय क्षेत्रों की बस्तियों का चैन-सुकून छीन लिया है।

घड़ियाल और मगरमच्छ का सबसे अधिक खतरा यमुनापार में है। 10 दिन पहले करछना के रामपुर उपरहार के पास नहर में ग्रामीणों ने चार से पांच मगरमच्छों का एक छुंड देखा। वन कर्मी पहुंचते इससे पहले मगरमच्छ ग्रामीणों की आंखों के आगे से ओझल हो गए।

दो दिन पहले जसरा के गौहनिया से होकर गुजरी एक नदी में मछली पकड़ते समय एक मगरमच्छ ग्रामीणों के जाल में फंस गया। बाद में उसकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि चार मगरमच्छ और यहां पर हैं। तीन दिन पहले छतनाग इलाके में एक भूखंड में लोगों ने मगरमच्छ देखा। कुछ यही हाल गंगा और यमुना के किनारे के अन्य गांवों व बस्तियों का है। यह तो महज उदाहरण है।

बीते डेढ़ से दो महीने के अंदर ही करीब 20 जगह घड़ियाल व मगरमच्छ देखे गए हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रयागराज में मगरमच्छों और घड़ियालों का प्राकृतिक वास नहीं है। इटावा के चंबल नदी और मध्य प्रदेश के पन्ना में केन नदी के संरक्षित क्षेत्र में यह पाए जाते हैं।

चंबल और केन दोनों ही नदियां यमुना में आकर मिलती हैं। बाढ़ के दौरान इटावा और पन्ना से मगरमच्छ व घड़ियाल बहकर यमुना में आ गए। यमुना के रास्ते यह प्रयागराज तक आ रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि वन विभाग अब तक एक भी मगरमच्छ या घड़ियाल संरक्षित नहीं कर पाया। यह नदियों व उसके आसपास के इलाकों में विचरण कर रहे हैं, जो न इंसानों के लिए ठीक है और न खुद मगरमच्छों और घड़ियालों के लिए।

जमीन से ज्यादा पानी में रहता है खतरा

वन विभाग के रेंजर लक्ष्मीकांत दुबे बताते हैं कि एक वयस्क मगरमच्छ का वजन 150 से 220 किलोग्राम तक हो सकता है। जमीन की अपेक्षा पानी में इसकी रफ्तार तेज होती है। पानी में यह शिकार ज्यादा करता है। यह अपने शरीर के वजन के दोगुना तक भारी पशु को अपना निवाला बना सकता है।

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घड़ियाल और मगरमच्छ में अंतर

  • मगरमच्छ का मुंह चौड़ा होता है, जबकि घड़ियाल का मुंह पतला होता है
  • मगरमच्छ आक्रामक होते हैं, जबकि घड़ियाल कुछ शांत स्वभाव के होते हैं
  • मगरमच्छ मछलियों संग पशुओं का तो घड़ियाल ज्यादातर मछलियां का शिकार करता है।
  • मगरमच्छ दलदली इलाकों, झीलों व नदियों के किनारे रहता है,
  • घड़ियाल साफ पानी और तेज बहाव वाली नदियों में रहता है।

मगरमच्छ व घड़ियाल दिखने की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर जा रही है, लेकिन अभी तक किसी मगरमच्छ को संरक्षित नहीं जा सका है। टीमें लगातार संबंधित क्षेत्रों निगरानी कर रहीं हैं।

                                                                                अरविंद कुमार यादव, डीएफओ