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रेलवे अधिकारी से तय हुआ 70 नहीं 50 हजार में कर देंगे ट्रांसफर, गड्डी थामते ही CBI टीम ने दौड़ाकर पकड़ा

By Amarish Kumar Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 11 Sep 2026 09:04 PM (IST)

रेलवे में पति-पत्नी के तबादले के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने वाले दोनों अधिकारियों को सीबीआई ने प्रयागराज ...और पढ़ें

प्रयागराज में छापेमारी के दौरान रेलवे आवास के समीप सीबीआई वाहन। जागरण आर्काइव

प्रयागराज में छापेमारी के दौरान रेलवे आवास के समीप सीबीआई वाहन। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. रेलवे में पति-पत्नी के एक साथ तबादले को 50 हजार रुपये घूस लेने वाले दो बड़े अफसर जेल भेजे गए

  2. दो दिन बाद भी उत्तर मध्य रेलवे घूसखोर अधिकारियों पर नहीं कर कर सका निलंबन जैसी कार्रवाई

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के प्रयागराज रेल मंडल में पति-पत्नी के एक साथ तबादले (स्पाउस ग्राउंड ट्रांसफर) के नाम पर घूसखोरी का बड़ा पर्दाफाश हुआ है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने जाल बिछाकर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए कार्यालय अधीक्षक (ओएस) को रंगे हाथ दबोच लिया। इसके तुरंत बाद घूसखोरी की साजिश में शामिल सहायक कार्मिक अधिकारी (एपीओ) को भी उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया।

लखनऊ की विशेष अदालत में पेश, भेजे गए जेल 

शुक्रवार को दोनों आरोपियों को लखनऊ स्थित विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इस बड़ी कार्रवाई के बाद रेलवे मुख्यालय तक हड़कंप मच गया है। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक (जीएम) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों कर्मियों को निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

तबादले की अर्जी अटकाकर मांगी थी 70 हजार की रिश्वत

मामले के अनुसार, प्रयागराज के मीरापुर इलाके के रहने वाले आशीष केसरवानी प्रयागराज लॉबी में वरिष्ठ सहायक लोको पायलट हैं। उनकी पत्नी सिम्मी केसरवानी भी रेलवे में इसी पद पर कानपुर में पदस्थ हैं। दोनों एक ही शहर में साथ रहकर नौकरी कर सकें, इसलिए सिम्मी ने नियमानुसार ''स्पाउस ग्राउंड'' (पति-पत्नी के एक ही स्टेशन पर पदस्थापन) के तहत कानपुर से प्रयागराज तबादले की अर्जी दी थी।

काम कराने के एवज में रिश्वत मांगी 

लंबे समय तक जब फाइल आगे नहीं बढ़ी, तो दंपती मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय पहुंचे। वहां वे सहायक कार्मिक अधिकारी (एपीओ) अरविंद कुमार से मिले। अरविंद कुमार ने उन्हें अपने अधीन काम करने वाले कार्यालय अधीक्षक (ओएस) राजेंद्र मणि त्रिपाठी के पास भेज दिया। राजेंद्र मणि ने काम कराने के एवज में सीधे 70 हजार रुपये रिश्वत की मांग रख दी।

सीबीआई में शिकायत और ट्रैप का जाल

रिश्वत देने के बजाय आशीष केसरवानी ने 8 सितंबर को पूरे मामले की लिखित शिकायत सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (लखनऊ) से कर दी। एजेंसी ने गोपनीय तरीके से मामले की जांच की, जिसमें रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई। इसके बाद 10 सितंबर को दोनों रेल कर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने की योजना बनाई गई।

घर के बाहर रिश्वत लेते पकड़ा गया ओएस, खुला राज

तय योजना के तहत गुरुवार को आशीष केसरवानी डीआरएम कार्यालय पहुंचे। फोन पर घूस की रकम 50 हजार रुपये तय हो चुकी थी। कार्यालय में एपीओ अरविंद कुमार ने खुद पैसे लेने से परहेज किया और फिर से ओएस राजेंद्र मणि से मिलने का इशारा किया। राजेंद्र मणि का आवास डीआरएम दफ्तर के ठीक पीछे स्थित है। उसने आशीष को गुरुवार रात अपने घर के बाहर बुलाया। जैसे ही आशीष ने 50 हजार रुपये के केमिकल लगे नोट राजेंद्र मणि को थमाए, पहले से घात लगाकर बैठी सीबीआई की टीम ने उसे दौड़ाकर मौके पर ही दबोच लिया।

आधी रात को डीआरएम दफ्तर खुलवाकर फाइलें जब्त

सीबीआई की पूछताछ में राजेंद्र मणि ने साफ कर दिया कि वह यह रकम एपीओ अरविंद कुमार के कहने पर ले रहा था। इसके तुरंत बाद सीबीआई ने देर रात अरविंद कुमार के आवास पर छापा मारा और उन्हें भी हिरासत में ले लिया। देर रात तक चली गहन पूछताछ के बाद रात करीब एक बजे सीबीआई की टीम रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के अधिकारियों को साथ लेकर डीआरएम दफ्तर पहुंची। वहां ताला खुलवाकर तबादले से जुड़ी मूल फाइलें और अन्य संदिग्ध दस्तावेज जब्त किए गए।

कोर्ट ने भेजा जेल, विभागीय कार्रवाई भी तेज

कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद सीबीआई टीम दोनों आरोपियों को अपने साथ लखनऊ ले गई। शुक्रवार को दोनों को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायाधीश ने दोनों को जेल भेजने का आदेश दे दिया। इधर, प्रयागराज मंडल में घूसखोरी का यह मामला उजागर होने के बाद हड़कंप मच गया है। एनसीआर के महाप्रबंधक ने घटना का कड़ा संज्ञान लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से निलंबित करने की विभागीय औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं।

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