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अपमान की मंशा न हो तो जाति से बुलाना एससी-एसटी एक्ट का अपराध नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट

Published: Fri, 01 May 2026 11:00 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अपमान की मंशा के बिना किसी को उसकी जाति से बुलाना एससी-एसटी एक्ट का अपराध नहीं है।

जाति से बुलाना एससी-एसटी एक्ट का अपराध नहीं, अगर अपमान की मंशा न हो: हाई कोर्ट।

जाति से बुलाना एससी-एसटी एक्ट का अपराध नहीं, अगर अपमान की मंशा न हो: हाई कोर्ट।

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विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अपमान की मंशा बिना किसी को उसकी जाति से बुलाना एससी-एसटी एक्ट का अपराध नहीं है। ऐसा केस जारी रखना न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकलपीठ ने अमय पांडेय व तीन अन्य की अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली है।

कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत आपराधिक कार्यवाही रद कर दी है, किंतु कहा कि मारपीट व गाली गलौज की धाराओं में दर्ज केस चलेंगे। आरोप में एससी-एसटी एक्ट के अपराध के जरूरी तत्व मौजूद नहीं हैं। अभियोजन का दायित्व है कि प्रथमदृष्टया साक्ष्य से अपराध होना साबित करे।

याची की तरफ से अधिवक्ता गणेश शंकर श्रीवास्तव व अश्वनी कुमार ने बहस की। इनका कहना था कि अज्ञात के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई थी। इसमें कहीं भी जाति को लेकर अपराध का आरोप नहीं था। बाद में धारा 161 के बयान में कहानी बदली गई।

कहा गया कि शादी समारोह में जाति सूचक शब्द से अपमानित किया गया, किंतु कोई सुबूत नहीं है। मेडिकल जांच रिपोर्ट भी अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं करती। कोर्ट ने कहा, यह सुस्थापित है कि एससी/एसटी अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई के लिए अभियोजन को प्रथम दृष्टया यह स्थापित करना होगा कि अभियुक्त ने पीड़ित को जानबूझकर इस आधार पर अपमानित किया कि ऐसा व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का है और यह कि ऐसा कृत्य लोक दृष्टि के भीतर किसी स्थान पर किया गया था।

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वर्तमान मामले में एफआइआर या अन्वेषण के दौरान अभिलिखित बयानों में यह दर्शाने के लिए एक शब्द भी नहीं है कि अपीलार्थियों ने शिकायतकर्ता को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करने के लिए आपराधिक आशय से ऐसा किया था।

ऐसा कोई साक्ष्य नहीं, जिसके आधार पर कहा जा सके कि जाति को लेकर विवाद हुआ हो। सरकारी वकील का कहना था कि पुलिस चार्जशीट पर विशेष अदालत ने संज्ञान लेकर समन जारी किया है। अपीलार्थियों अमय पांडेय व अन्य के खिलाफ सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज पुलिस ने नंदन की शिकायत पर केस दर्ज किया था।