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'मुआवजे पर 30 दिन में निर्णय करे जिला प्रशासन, न्यायिक आयोग नहीं', महाकुंभ भगदड़ केस पर हाई कोर्ट

Published: Fri, 01 May 2026 10:10 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महाकुंभ मेले (जनवरी 2025) की भगदड़ में पीड़ितों के मुआवजे पर स्पष्ट किया है कि इसका ...और पढ़ें

मुआवजा पर 30 दिन में निर्णय करे जिला प्रशासन, न्यायिक आयोग नहीं- हाई कोर्ट।

मुआवजा पर 30 दिन में निर्णय करे जिला प्रशासन, न्यायिक आयोग नहीं- हाई कोर्ट।

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विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महाकुंभ मेले (जनवरी 2025) में मची भगदड़ को लेकर स्पष्ट किया है कि पीड़ितों को अनुग्रह मुआवजा देने संबंधी दावों का निपटारा राज्य द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग नहीं, बल्कि जिला प्रशासन और मेला प्राधिकरण करेगा।

हाई कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने संजय कुमार शर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

याचिका में 29 जनवरी 2025 (मौनी अमावस्या) को हुई भगदड़ में उनके रिश्तेदार की मौत पर मुआवजा मांगा गया है।अदालत ने न्यायिक जांच आयोग के सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे का अवलोकन करते हुए कहा कि मुआवजा दावों का निपटारा करना आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

आयोग का कार्य केवल घटना के कारणों और परिस्थितियों की जांच करना, भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के सुझाव देना और प्रशासनिक समन्वय की समीक्षा करना है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने भगदड़ की घटना से इन्कार नहीं किया है और कुछ मृतकों के आश्रितों को पहले ही मुआवजा दिए जाने की बात सामने आई है।

यह भी पढ़ें- महाकुंभ भगदड़ मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश- 30 दिनों में मिले मुआवजा, राज्य सरकार की अपील नामंजूर

कोर्ट ने कहा, ऐसे में आयोग द्वारा यह जांच करना कि भगदड़ हुई या नहीं, आवश्यक नहीं है। प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए अदालत ने निर्देश दिए कि सभी मुआवजा दावे जिला प्रशासन/मेलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं, जहां प्रत्येक मामले में मृत्यु या क्षति के तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा।

पुलिस की इनक्वेस्ट (पंचनामा) रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को जब तक विपरीत साक्ष्य न हो, प्रामाणिक माना जाएगा। साथ ही मेलाधिकारी को प्रत्येक दावे पर 30 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लेना होगा।

वर्तमान मामले में अदालत ने पाया कि मृतक की इनक्वेस्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध है और विवादित नहीं है, इसलिए कोर्ट ने मेलाधिकारी को तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने और सात मई तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।