घर बैठे देश के किसी भी कोने से गाय-भैस खरीद और बेच सकेंगे पशुपालक, शुरू होगा पशुओं का 'ई-बाजार'
पशुपालन विभाग 'भारत पशुधन पोर्टल' पर एक ई-बाजार शुरू कर रहा है, जिससे पशुपालक घर बैठे देश के किसी भी कोने से पशु खरीद व बेच सकेंगे।

यह तस्वीर एआई जेनेरेटेड है
HighLights
पशुपालन विभाग 'भारत पशुधन पोर्टल' पर ई-बाजार शुरू करेगा।
पशुपालक घर बैठे देश भर से पशु खरीद-बेच सकेंगे आसानी से।
पशुओं की उम्र, दुग्ध उत्पादन की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध होगी।
सूर्यप्रकाश तिवारी, प्रयागराज। कोई भैंस खरीदने के लिए पंजाब और हरियाणा जाता है तो कोई देशी नस्ल की गाय की तलाश में राजस्थान व गुजरात। इसमें पशुपालकों को तमाम दिक्कतें भी झेलनी पड़ती हैं। पशुपालन विभाग आने वाले दिनों में पशुओं का एक ऐसा ई-बाजार उपलब्ध कराने जा रहा है, जो इन मुश्किलों से निजात दिलाएगा। घर में बैठे-बैठे ही पशुपालक देश के किसी भी कोने से गाय, भैंस, बकरी सहित अन्य पशु खरीद सकेंगे। अपने पशु बेच भी सकेंगे।
पशुपालन विभाग के भारत पशुधन पोर्टल पर यह ई-बाजार चलेगा। इसमें पशुपालक अपने बेचने वाले पशुओं की जानकारी अपलोड कर देंगे। तस्वीरों के साथ संबंधित पशु की उम्र, दुग्ध उत्पादन की क्षमता, उसके ब्यात का पूरा लेखा-जोखा पोर्टल पर रहेगा।
हर पशु में टैग लगे होंगे, जिनका पंजीकरण नंबर उनकी आईडी का काम करेगा। पशुपालन विभाग के प्रयागराज मंडल के अपर निदेशक ग्रेड-2 डॉ. एसके मिश्र ने बताया कि इस नई व्यवस्था के अनुरूप भारत पशुधन पोर्टल को अपडेट किया जा रहा है।
गांवों में तैनात पंचायत सहायकों को पंचायत नोडल अधिकारी (पीएनओ) बनाया जा रहा है। पोर्टल पर इनकी आईडी जनरेट होगी। पासवर्ड दिया जाएगा। यही गांव के पशुपालकों का पंजीकरण और पशुओं का ब्योरा अपडेट करेंगे। पंजीकृत पशुपालक अपने पशुओं को बेचने के लिए खुद ही रिक्वेस्ट डाल सकेंगे।
इसी तरह पशुओं की खरीद भी होगी। इस तरह पशुपालकों को अच्छे पशुओं की तलाश में बेवजह की दौड़भाग नहीं करनी पड़ेगी। एक बार पशु पसंद आने के बाद उसके मालिक से संपर्क कर खरीद-फरोख्त कर सकेंगे।
गंगापार में सबसे अधिक पशुपालन
जिले के सभी आठ तहसील क्षेत्रों में पशुपालन हो रहा है। गांव-गांव के लोग इससे जुड़े हैं। किसान इसे व्यवसायिक या डेयरी का रूप दे रहे हैं, लेकिन गंगापार क्षेत्र इसमें सबसे आगे हैं। यहां के सोरांव, हंडिया और फूलपुर इलाके में पशुपालक दुधारू पशुओं की नस्लों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
हरियाणा, पंजाब, राजस्थान से आते हैं दुधारू पशु
जिले में पशुपालक होलिस्टन फ्रीजियन (एचएफ) क्रास, जर्सी क्रास, देशी में शाहीवाल, गिर, थारपारकर और हरियाणा नस्ल की गाय ज्यादा पसंद कर रहे हैं। भैंसों में मुर्रा नस्ल की सबसे अधिक मांग है। गोरखपुर के अलावा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात से इन नस्लों के दुधारू पशु आते हैं।
गाय-भैंस की नस्ल व दुग्ध उत्पादन की क्षमता
- शाहीवाल व गिर गाय - 15 से 20 लीटर प्रतिदिन
- थारपारकर व हरियाणा गाय - 10 से 12 लीटर प्रतिदिन
- जर्सी क्रास ब्रीड गाय - 20 से 35 लीटर प्रतिदिन
- एचएफ क्रास ब्रीड गाय - 20 से 55 लीटर प्रतिदिन
नोट- दुग्ध उत्पादन की क्षमता के यह आंकड़े अनुमानित हैं।
जनपद में दुधारू पशु और दुग्ध उत्पादन
- कुल गोवंशीय व महिषवंशीय पशु - 8,85,697
- दुधारू गोवंशीय पशु - 1,37,200
- दुधारू महिषवंशीय पशु - 2,02,800
- प्रतिदिन अनुमानित दुग्ध उत्पादन - 826 हजार मीट्रिक टन
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