विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

इस्लाम अपनाने के बाद ST का दर्जा बरकरार रखना मुश्किल, हाईकोर्ट ने खारिज कीं तीन याचिकाएं

Published: Tue, 15 Sep 2026 03:05 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोनभद्र की नन्हकी उर्फ नैमुन्निशा की तीन याचिकाएं खारिज करते हुए उसके कृषि भूमि के बैनामों ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने नैमुन्निशा की तीन याचिकाएं खारिज कीं।

  2. महिला भुइयां अनुसूचित जनजाति का दर्जा साबित न कर सकी।

  3. मतांतरण के बाद रीति-रिवाज का पालन महत्वपूर्ण है।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोनभद्र की नन्हकी उर्फ नैमुन्निशा नामक महिला की तीन याचिकाएं खारिज करते हुए उसके द्वारा खरीदे गए कृषि भूमि के बैनामों को अवैध ठहराने संबंधी राजस्व अधिकारी के आदेश को सही माना है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार की एकलपीठ ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा, महिला यह साबित नहीं कर सकी कि बैनामों के समय वह भुइयां अनुसूचित जनजाति की सदस्य थी।

याची दुद्धी तहसील की निवासी है। उसका दावा था कि वह जन्म से भुइयां है और उसके पिता महावीर अनुसूचित जनजाति (एसटी) से हैं। उसने तहसीलदार से जारी एसटी प्रमाणपत्र के आधार पर गांव बघारू में तीन अलग-अलग बैनामों से जमीन खरीदी थी। याची का तर्क था कि इस्लाम अनुयायी सिराजुद्दीन से शादी अथवा दस्तावेज में मुस्लिम लिखे होने से एसटी का दर्जा खत्म नहीं होता।

कोर्ट ने कहा कि यह सही है कि मतांतरण अपने आप एसटी दर्जा खत्म नहीं करता है, लेकिन जन्म से एसटी होना ही काफी नहीं है। देखना होगा कि सौदे के समय तक वह भुइयां समुदाय के रीति-रिवाज, सामाजिक जीवन में भागीदारी और समुदाय की स्वीकृति बनाए हुए थी या नहीं। रिकार्ड में लंबे समय से उसकी मुस्लिम पहचान, परिवार और सामाजिक जीवन दिख रहा है, जबकि भुइयां समुदाय से जुड़ाव का कोई ठोस सुबूत नहीं है।

इसलिए वह एसटी दर्जा बनाए रखने में विफल रही। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्री, कब्जा या समय बीत जाने के कारण कानून से प्रतिबंधित सौदा वैध नहीं हो जाता। धारा 157-बी के तहत एसटी की जमीन गैर-एसटी को बेचना मान्य नहीं है और धारा 166-167 के तहत जमीन सरकार में निहित हो जाती है। वैकल्पिक अपील का तर्क भी कोर्ट ने खारिज कर दिया।

मामले से जुड़ा तथ्य यह है कि जमीन विक्रेता गौड़ भी अनुसूचित जनजाति के थे। बैनामे 2011, 2017 और 2018 में हुए थे और नौ साल तक इन पर कोई आपत्ति नहीं हुई, दाखिल-खारिज भी हो गया। बाद में राजस्व संहिता 2006 की धारा 104-105 के तहत कार्रवाई शुरू हुई।

12 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी हुआ और डिप्टी कलेक्टर दुद्धी ने 22 जनवरी 2026 को तीनों आदेशों से बैनामों को यूपी जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 157-बी और संहिता की धारा 99 के उल्लंघन में शून्य घोषित कर जमीन सरकार में निहित करने का आदेश दिया।

यह भी पढ़ें- प्रयागराज: सुलेमसराय दधिकांदो के मेले में जमकर अराजकता, कई जगह हुई मारपीट; दो युवकों के सिर फूटे