लाल-नीली बत्ती का दुरुपयोग: अपर निदेशक का निलंबन बरकरार, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डॉ. अनिल कुमार के निलंबन को बरकरार रखा है। सरकारी वाहन ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
हाई कोर्ट ने डॉ. अनिल कुमार का निलंबन बरकरार रखा।
सरकारी वाहन पर अवैध लाल-नीली बत्ती का आरोप था।
निलंबन आदेश में हस्तक्षेप से कोर्ट ने इनकार किया।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सरकारी वाहन में अवैध रूप से लाल-नीली बत्ती लगाकर चलने तथा अन्य अनियमितताओं के आरोप में निलंबित पशुपालन विभाग प्रयागराज मंडल के अपर निदेशक ग्रेड-2 डा. अनिल कुमार को इलाहाबाद हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल सकी है। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकलपीठ ने अपने आदेश में निलंबन आदेश में हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए कहा है कि याची अधिकारी का निलंबन किसी विधायक या मंत्री के निर्देश पर नहीं किया गया है।
याची इस आरोप का कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका कि निलंबन विधायक की शिकायत पर हुआ है। कोर्ट ने डा. अनिल कुमार की याचिका इस निर्देश के साथ निस्तारित कर दी है कि अन्य विधिक अड़चन न होने की दशा में अनुशासनिक कार्यवाही शीघ्रता से अधिमानत: तीन महीने में पूरी कर ली जाए। पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने 21 जुलाई, 2026 के आदेश से याची को निलंबित किया है।
गोरखपुर के मंडलायुक्त कार्यालय से सम्बद्ध याची के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में दलील दी कि यह निलंबन 21 मई 2026 को विधायक द्वारा मंत्रालय में की गई शिकायत के आधार पर किया गया है। कोर्ट ने छह अगस्त, 2026 को दिए आदेश में सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से उपस्थित अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष कहा कि निलंबन आदेश संबंधित विधायक या मंत्री के निर्देश पर पारित नहीं किया गया है।
याची ने खुद जो दस्तावेज दाखिल किया है, उसके अनुलग्नक संख्या-7 से स्पष्ट है कि संबंधित विधायक ने अपनी शिकायत वापस ले ली थी। शिकायत वापसी के काफी बाद निलंबन आदेश जारी हुआ है। याची के आरोप को साबित करने के लिए रिकार्ड पर कोई सामग्री नहीं है। कोर्ट ने कहा कि उक्त स्थिति में निलंबन आदेश में हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है।
याची की ओर से बताया गया कि उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हो चुका है और उसने जवाब भी दे दिया है। डा. अनिल कुमार के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने समूह ग-घ कर्मियों के नियम विरुद्ध स्थानांतरण किए। सरकारी वाहन यूपी70 एजी- 2200 पर अवैध लाल-नीली बत्ती लगाई। कर्मियों/गोशालाओं से अवैध वसूली और मानसिक उत्पीड़न किया। मानव संपदा पोर्टल पर प्रविष्टि नहीं की और शासकीय आपरेशन थियेटर में कार्यालय चलाया। इन आरोपों के मद्देनजर 12 जून 2026 से अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित है।
