अंतरिम भरण-पोषण में हर साल 10 प्रतिशत वृद्धि का फैसला सराहनीय, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रखा बरकरार
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज फैमिली कोर्ट के पत्नी के अंतरिम भरण-पोषण भत्ते में हर साल 10% वृद्धि के आदेश ...और पढ़ें
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के 10% वार्षिक वृद्धि आदेश को बरकरार रखा।
पत्नी के अंतरिम भरण-पोषण भत्ते में हर साल 10 प्रतिशत की वृद्धि का फैसला।
यह फैसला भविष्य के मुकदमों को रोकने में सहायक होगा, कोर्ट ने सराहा।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पत्नी के अंतरिम भरण-पोषण भत्ते में हर साल 10 प्रतिशत की वृद्धि संबंधी प्रयागराज स्थित फैमिली कोर्ट के आदेश को 'अनोखा विचार' बताते हुए उसकी सराहना की और उसे बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत शुक्ला ने राकेश कुमार की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा, ‘ट्रायल कोर्ट का आदेश अनोखा है।
यह बहुत आश्चर्य की बात है कि ऐसा अनोखा विचार इस कोर्ट के मन में नहीं आया। ट्रायल कोर्ट द्वारा उठाया गया कदम स्वागत योग्य है और सराहनीय है।" अपर प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय कोर्ट के 17 सितंबर 2025 को पारित आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की गई थी।
फैमिली कोर्ट ने आवेदन आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पति को आदेश दिया था कि वह पत्नी को आवेदन दाखिल करने की तारीख से तीन हजार रुपये प्रतिमाह और फैसले की तारीख से चार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देगा। इस राशि में हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।
याची के वकील का कहना था कि उसकी चुनौती केवल हर साल 10 प्रतिशत बढ़ोतरी के आदेश को लेकर है और यह कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है। पत्नी और राज्य सरकार की ओर से इस आदेश का समर्थन किया गया। उन्होंने दलील दी कि 10 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी का आदेश भविष्य में भत्ता बढ़ाने को लेकर होने वाले नए मुकदमों को रोकेगा।
ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट में लंबित मामलों को देखते हुए ट्रायल कोर्ट का यह कदम स्वागत योग्य है। यह पत्नी और बच्चों को दोबारा भत्ता बढ़ाने के लिए आवेदन दायर करने से बचाने का एक नया तरीका है। हाई कोर्ट ने इस तर्क से सहमति जताई।
