इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- अधिक उम्र में दी नियुक्ति तो सात साल बाद हटाना अनुचित
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुरादाबाद की शिक्षिका अनिता रानी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि यदि विभाग ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
विभाग की गलती, अधिक उम्र में नियुक्त शिक्षिका को हटाना अनुचित।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिक्षिका अनिता रानी को सेवा में बहाल किया।
शिक्षिका को सेवा से पृथक रहने की अवधि का वेतन नहीं मिलेगा।
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुरादाबाद की शिक्षिका अनिता रानी को बड़ी राहत देते हुए कहा कि यदि विभाग ने स्वयं अधिक आयु में नियुक्ति दी है तो सात वर्ष से अधिक समय बाद शिक्षिका को हटाना उचित नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आयु की गणना में हुई गलती विभागीय अधिकारियों की है, न कि याची की।
कोर्ट ने यह भी माना कि याची ने न तो कोई धोखाधड़ी की और न ही कोई तथ्य छिपाया। यह फैसला न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने विशेष अपील पर सुनाया। खंडपीठ ने हाई कोर्ट की एकल पीठ के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें विभाग द्वारा नियुक्ति शून्य घोषित किए जाने के निर्णय को बरकरार रखा गया था।
खंडपीठ ने याची को पुनः सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया, हालांकि यह स्पष्ट किया कि सेवा से पृथक रहने की अवधि का वेतन उन्हें नहीं मिलेगा। अनिता रानी ने वर्ष 2008 में स्पेशल बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (बीटीसी) की चयन प्रक्रिया में भाग लिया। उन्होंने पांच जून 2012 को प्रशिक्षण पूर्ण किया और 24 मई 2014 को यूपीटीईटी उत्तीर्ण की।
यह भी पढ़ें- रायबरेली से फरवरी में प्रयागराज समेत तीन रूटों पर होगा बस संचालन, ग्रामीण यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ
इसके बाद नौ दिसंबर 2014 को 15 हजार सहायक शिक्षक भर्ती विज्ञापन के तहत आवेदन किया। दो जुलाई 2016 को उनकी नियुक्ति कर दी गई। 20 दिसंबर 2017 को उन्हें नोटिस जारी कर कहा गया कि उनकी नियुक्ति शून्य है क्योंकि नियुक्ति के समय उनकी आयु 50 वर्ष से अधिक थी।
