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यूजीसी-नेट परीक्षा के विवादित प्रश्न पर हाई कोर्ट सख्त, NTA से मांगा स्पष्टीकरण

Published: Tue, 22 Sep 2026 06:45 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूजीसी-नेट परीक्षा के एक विवादित प्रश्न पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ...और पढ़ें

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने यूजीसी-नेट के विवादित प्रश्न पर स्पष्टीकरण मांगा।

  2. एनटीए को प्रश्न विशेषज्ञ और समिति सदस्यों का विवरण देने का निर्देश।

  3. याची ऋतिक श्रीवास्तव ने प्रश्न की अस्पष्टता पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। यूजीसी-नेट 2026 की ला परीक्षा के एक विवादित प्रश्न को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने प्रश्न संख्या 144 तैयार करने वाले विषय विशेषज्ञ और मार्किंग स्कीम बनाने वाली समिति के सदस्यों का नाम, मोबाइल नंबर और पता अगली सुनवाई से पहले पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने यह आदेश ऋतिक श्रीवास्तव की याचिका पर दिया।

मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।याची ने स्वयं पैरवी करते हुए बताया कि उसने परीक्षा के सभी 150 प्रश्न हल किए थे। प्रश्न संख्या 144 भारतीय संविधान के संघीय स्वरूप से संबंधित था। इसमें पूछा गया था कि इनमें से कौन-सी संघीय संविधान की विशेषता नहीं है। विकल्पों में 1-शक्ति का पृथक्करण, 2-शक्ति का विभाजन, 3-लिखित एवं कठोर संविधान और 4-कोर्ट की सर्वोच्चता शामिल थे।

याची ने चौथा विकल्प चुना, जबकि एनटीए ने पहले विकल्प को सही उत्तर माना। याची का तर्क है कि प्रश्न अस्पष्ट था और इसके दो संभावित सही उत्तर हो सकते थे। उसने 18 अगस्त को एनटीए के पोर्टल पर आपत्ति भी दर्ज कराई थी, लेकिन उसका समाधान नहीं हुआ। याची को इस विषय में 300 में से 202 अंक मिले, जबकि कटआफ 204 अंक था।

उसका कहना है कि विवादित प्रश्न के दो अंक मिलने पर उसके अंक 204 हो जाते और वह जूनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए पात्र हो जाता।एनटीए की ओर से परीक्षा सूचना पुस्तिका में दी गई मार्किंग स्कीम का हवाला दिया गया। इसके अनुसार प्रश्नों पर प्राप्त चुनौतियों की समीक्षा विषय विशेषज्ञों से कराई जाती है और संशोधित अंतिम उत्तर कुंजी परिणाम से पहले जारी की जाती है।

यदि किसी प्रश्न के एक से अधिक विकल्प सही पाए जाते हैं तो संबंधित सही विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थियों को अंक देने का प्रविधान भी है। कोर्ट ने कहा कि विवाद को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि प्रश्न किस विशेषज्ञ ने तैयार किया और मार्किंग स्कीम किस समिति ने बनाई। इसलिए एनटीए को इन विशेषज्ञों और समिति सदस्यों का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

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