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'कोमा में गए व्यक्ति की मौत पर आश्रितों का असहाय होना चिंताजनक', हाई कोर्ट ने ठोस गाइडलाइन लाने को कहा

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Fri, 23 Oct 2026 06:31 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोमा में गए मरीज की मौत के बाद उसकी पत्नी को बैंक खाते से पैसा न ...और पढ़ें

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने कोमा मरीज के आश्रितों की स्थिति पर चिंता जताई।

  2. आरबीआई और केंद्र सरकार से ठोस गाइडलाइन बनाने को कहा।

  3. कानपुर की परवीन जहां की याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई की।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। कोमा में मरीज की मौत के बाद भी उसकी पत्नी को बचत खाते में जमा पैसा नहीं मिलने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि कोमा में गए मरीज के खाते में पड़ा पैसा उसके आश्रितों को कैसे मिले, इसके लिए कानून अथवा आरबीआइ की गाइडलाइन होनी चाहिए।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने कानपुर नगर निवासी परवीन जहां की याचिका की सुनवाई के दौरान की है। फिलहाल कोर्ट ने याची को मृतक के एसबीआइ के खाते में जमा पैसा उत्तराधिकार के जरिये लेने की छूट दी है।

अगली सुनवाई छह नवंबर को होगी।याची के वकील ने कोर्ट को बताया कि कोमा में गए खाताधारक पति शमशाद अली की मौत हो गई है। जुलाई में परवीन ने याचिका दायर कर मल्टीपल डिसेबिलिटी एक्ट 1999 के तहत खुद को गार्जियन घोषित कराने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा, ‘यह चिंता का विषय है कि कोमा में व्यक्ति की मौत पर उसके आश्रित बिल्कुल असहाय हो जाते हैं।

खंडपीठ ने क्या कहा?

उनके पास न तो अस्पताल का खर्च उठाने और न ही घर चलाने के लिए पैसा होता है।’ खंडपीठ ने कहा, ‘सक्षम विधायिका से कानून या आरबीआइ की तरफ से राष्ट्रीयकृत बैंकों के लिए गाइडलाइन जरूरी है, ताकि यह तय हो सके कि ऐसे मरीजों के खाते का पैसा आश्रितों को कैसे रिलीज किया जाएगा।’

कोर्ट ने केंद्र सरकार और आरबीआइ को अपना रुख साफ करने का निर्देश देते हुए अलग-अलग हलफनामा दाखिल कर यह बताने के लिए कहा है कि क्या उनके पास ऐसी विशेष और आपात परिस्थितियों के लिए कोई प्रस्ताव या गाइडलाइन है? याची को निर्देश दिया कि आरबीआइ के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (बैंकिंग रेगुलेशन) और वित्त मंत्रालय के सचिव को पक्षकार बनाएं।

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कोर्ट के अनुसार राज्य सरकार केरल हाई कोर्ट के शोभा गोपालकृष्णन बनाम केरल राज्य केस की गाइडलाइन पर विचार कर सकती है, जिसका उल्लेख उमा मित्तल केस में है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को ठोस समाधान के साथ हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है अन्यथा उन्हें अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। केंद्र और आरबीआइ का हलफनामा नहीं मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति के लिए भी आदेश दिया जाएगा।